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अगर आज भी बोली-ठोली न होगी तो होली ठिकाने की होली न होगी
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@nazeer-banarasi
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Nazm
अगर आज भी बोली-ठोली न होगी तो होली ठिकाने की होली न होगी
उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात में एक लम्हा ज़िंदगी भर की कमाई खा गया
मिल जाऊँगा दरिया में तो हो जाऊँगा दरिया सिर्फ़ इस लिए क़तरा हूँ कि मैं दरिया से जुदा हूँ
कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में
आँखों की नींद दोनों तरह से हराम है उस बे-वफ़ा को याद करें या भुलाएँ हम
बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया
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