kitne chehre badal rahi duniya khuub shatir hai matlabi duniya tum ko dhoka nahin mila matlab tum ko dhoke men rakh rahi duniya ek ashiq udaas hai phir se yaani phir jiit hi gai duniya tu jise apni duniya kahta hai vo basa legi ik nai duniya saari duniya men tu hi mera hai tere hone se hai miri duniya kitne chehre badal rahi duniya khub shatir hai matlabi duniya tum ko dhoka nahin mila matlab tum ko dhoke mein rakh rahi duniya ek aashiq udas hai phir se yani phir jit hi gai duniya tu jise apni duniya kahta hai wo basa legi ek nai duniya sari duniya mein tu hi mera hai tere hone se hai meri duniya
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चल दिए फेर कर नज़र तुम भी ग़ैर तो ग़ैर थे मगर तुम भी ये गली मेरे दिलरुबा की है दोस्तों ख़ैरियत इधर तुम भी मुझ पे लोगों के साथ हँसते हो लोग रोएँगे ख़ास कर तुम भी मुझ को ठुकरा दिया है दुनिया ने मैं तो मर जाऊँगा अगर तुम भी उस की गाड़ी तो जा चुकी 'ताबिश' अब उठो जाओ अपने घर तुम भी
Zubair Ali Tabish
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फिर मिरी याद आ रही होगी फिर वो दीपक बुझा रही होगी फिर मिरे फेसबुक पे आ कर वो ख़ुद को बैनर बना रही होगी अपने बेटे का चूम कर माथा मुझ को टीका लगा रही होगी फिर उसी ने उसे छुआ होगा फिर उसी से निभा रही होगी जिस्म चादर सा बिछ गया होगा रूह सिलवट हटा रही होगी फिर से इक रात कट गई होगी फिर से इक रात आ रही होगी
Kumar Vishwas
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ग़ज़ल तो सब को मीठी लग रही थी मगर नातिक को मिर्ची लग रही थी तुम्हारे लब नहीं चू में थे जब तक मुझे हर चीज़ कड़वी लग रही थी मैं जिस दिन छोड़ने वाला था उस को वो उस दिन सब सेे प्यारी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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उस के हाथों में जो ख़ंजर है ज़्यादा तेज है और फिर बचपन से ही उस का निशाना तेज है जब कभी उस पार जाने का ख़याल आता मुझे कोई आहिस्ता से कहता था की दरिया तेज है आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज है अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास मैं तुम्हें कहता भी रहता की दुनिया तेज है आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोडा सा मीठा तेज है
Tehzeeb Hafi
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किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर ज़मीं पर बनाया न घर ज़िंदगी भर सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर
Anwar Shaoor
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