ghazalKuch Alfaaz

maan mausam ka kaha chhai ghata jaam utha aag se aag bujha phuul khila jaam utha pi mire yaar tujhe apni qasam deta huun bhuul ja shikva gila haath mila jaam utha haath men chand jahan aaya muqaddar chamka sab badal jaega qismat ka likha jaam utha ek pal bhi kabhi ho jaata hai sadiyon jaisa der kya karna yahan haath badha jaam utha pyaar hi pyaar hai sab log barabar hain yahan mai-kade men koi chhota na bada jaam utha man mausam ka kaha chhai ghata jam utha aag se aag bujha phul khila jam utha pi mere yar tujhe apni qasam deta hun bhul ja shikwa gila hath mila jam utha hath mein chand jahan aaya muqaddar chamka sab badal jaega qismat ka likha jam utha ek pal bhi kabhi ho jata hai sadiyon jaisa der kya karna yahan hath badha jam utha pyar hi pyar hai sab log barabar hain yahan mai-kade mein koi chhota na bada jam utha

Related Ghazal

यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

526 likes

चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

406 likes

जाम सिगरेट कश और बस कुछ धुआँ आख़िरश और बस मौत तक ज़िंदगी का सफ़र रात-दिन कश्मकश और बस पी गया पेड़ आँधी मगर गिर पड़ा खा के ग़श और बस ज़िंदगी जलती सिगरेट है सिर्फ़ दो-चार कश और बस सूखते पेड़ की लकड़ियाँ आख़िरी पेशकश और बस

Sandeep Thakur

50 likes

तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा ख़्वाब लेने कोई आए कि न आए कोई मैं तो आवाज़ लगाऊँगा चला जाऊँगा चंद यादें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं उन को सीने से लगाऊँगा चला जाऊँगा मुद्दतों बा'द मैं आया हूँ पुराने घर में ख़ुद को जी भर के रुलाऊँगा चला जाऊँगा इस जज़ीरे में ज़ियादा नहीं रहना अब तो आजकल नाव बनाऊँगा चला जाऊँगा मौसम-ए-गुल की तरह लौट के आऊँगा 'हसन' हर तरफ़ फूल खिलाऊँगा चला जाऊँगा

Hasan Abbasi

235 likes

कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

435 likes

More from Bashir Badr

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा आग से आग बुझा फूल खिला जाम उठा पी मिरे यार तुझे अपनी क़सम देता हूँ भूल जा शिकवा गिला हाथ मिला जाम उठा हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका सब बदल जाएगा क़िस्मत का लिखा जाम उठा एक पल भी कभी हो जाता है सदियों जैसा देर क्या करना यहाँ हाथ बढ़ा जाम उठा प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर हैं यहाँ मय-कदे में कोई छोटा न बड़ा जाम उठा

Bashir Badr

1 likes

जब सहर चुप हो हँसा लो हम को जब अँधेरा हो जला लो हम को हम हक़ीक़त हैं नज़र आते हैं दास्तानों में छुपा लो हम को ख़ून का काम रवाँ रहना है जिस जगह चाहो बहा लो हम को दिन न पा जाए कहीं शब का राज़ सुब्ह से पहले उठा लो हम को हम ज़माने के सताए हैं बहुत अपने सीने से लगा लो हम को वक़्त के होंट हमें छू लेंगे अन-कहे बोल हैं गा लो हम को

Bashir Badr

1 likes

फ़लक से चाँद सितारों से जाम लेना है मुझे सहरस नई एक शाम लेना है किसे ख़बर कि फ़रिश्ते ग़ज़ल समझते हैं ख़ुदा के सामने काफ़िर का नाम लेना है मुआ'मला है तिरा बदतरीन दुश्मन से मिरे अज़ीज़ मोहब्बत से काम लेना है महकती ज़ुल्फ़ों से ख़ुशबू चमकती आँख से धूप शबों से जाम-ए-सहर का सलाम लेना है तुम्हारी चाल की आहिस्तगी के लहजे में सुख़न से दिल को मसलने का काम लेना है नहीं मैं 'मीर' के दर पर कभी नहीं जाता मुझे ख़ुदा से ग़ज़ल का कलाम लेना है बड़े सलीक़े से नोटों में उस को तुल्वा कर अमीर-ए-शहरस अब इंतिक़ाम लेना है

Bashir Badr

1 likes

पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है इक ज़ेहन-ए-परेशाँ में ख़्वाब-ए-ग़ज़लिस्ताँ है पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है हम-रंग-ए-दिल-ए-पुर-ख़ूँ हर लाला-ए-सहराई गेसू की तरह मुज़्तर अब रात की रानी है जिस संग पे नज़रें कीं ख़ुर्शीद-ए-हक़ीक़त है जिस चाँद से मुँह मोड़ा पत्थर की कहानी है ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में नादीदा हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता कहानी है वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी है जिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैं ऐ 'बद्र' मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है

Bashir Badr

1 likes

जब तक निगार-ए-दश्त का सीना दुखा न था सहरा में कोई लाला-ए-सहरा खिला न था दो झीलें उस की आँखों में लहरा के सो गईं उस वक़्त मेरी उम्र का दरिया चढ़ा न था जागी न थीं नसों में तमन्ना की नागिनें उस गंदुमी शराब को जब तक चखा न था ढूँडा करो जहान-ए-तहय्युर में उम्र भर वो चलती फिरती छाँव है मैं ने कहा न था इक बे-वफ़ा के सामने आँसू बहाते हम इतना हमारी आँख का पानी मरा न था वो काले होंट जाम समझ कर चढ़ा गए वो आब जिस से मैं ने वुज़ू तक किया न था सब लोग अपने अपने ख़ुदाओं को लाए थे एक हम ऐसे थे कि हमारा ख़ुदा न था वो काली आँखें शहर में मशहूर थीं बहुत तब उन पे मोटे शीशों का चश्मा चढ़ा न था मैं साहिब-ए-ग़ज़ल था हसीनों की बज़्म में सर पर घनेरे बाल थे माथा खुला न था

Bashir Badr

3 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Bashir Badr.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Bashir Badr's ghazal.