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मैं उस की आँखों से छलकी शराब पीता हूँ ग़रीब हो के भी महँगी शराब पीता हूँ मुझे नशे में बहकते कभी नहीं देखा वो जानता है मैं कितनी शराब पीता हूँ उसे भी देखूँ तो पहचानने में देर लगे कभी कभी तो मैं इतनी शराब पीता हूँ पुराने चाहने वालों की याद आने लगे इसी लिए मैं पुरानी शराब पीता हूँ

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा ख़्वाब लेने कोई आए कि न आए कोई मैं तो आवाज़ लगाऊँगा चला जाऊँगा चंद यादें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं उन को सीने से लगाऊँगा चला जाऊँगा मुद्दतों बा'द मैं आया हूँ पुराने घर में ख़ुद को जी भर के रुलाऊँगा चला जाऊँगा इस जज़ीरे में ज़ियादा नहीं रहना अब तो आजकल नाव बनाऊँगा चला जाऊँगा मौसम-ए-गुल की तरह लौट के आऊँगा 'हसन' हर तरफ़ फूल खिलाऊँगा चला जाऊँगा

Hasan Abbasi

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शो'ला ही सही आग लगाने के लिए आ फिर नूर के मंज़र को दिखाने के लिए आ ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ ऐ दोस्त मुझे गर्दिश-ए-हालात ने घेरा तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिए आ दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ मतलब तिरी आमद से है दरमाँ से नहीं है 'हसरत' की क़सम दिल ही दुखाने के लिए आ

Hasrat Jaipuri

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हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं हम अश्क जुदाई के गिरने ही नहीं देते बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं होता चला आया है बे-दर्द ज़माने में सच्चाई की राहों में काँटे सभी बोते हैं अंदाज़-ए-सितम उन का देखे तो कोई 'हसरत' मिलने को तो मिलते हैं नश्तर से चुभोते हैं

Hasrat Jaipuri

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जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँँंनहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते लिल्लाह शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यूँ नहीं देते रह रह के न तड़पाओ ऐ बे-दर्द मसीहा हाथों से मुझे ज़हर पिला क्यूँ नहीं देते जब उस की वफ़ाओं पे यक़ीं तुम को नहीं है 'हसरत' को निगाहों से गिरा क्यूँ नहीं देते

Hasrat Jaipuri

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ये कौन आ गई दिल-रुबा महकी महकी फ़ज़ा महकी महकी हवा महकी महकी वो आँखों में काजल वो बालों में गजरा हथेली पे उस के हिना महकी महकी ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी सवेरे सवेरे मिरे घर पे आई ऐ 'हसरत' वो बाद-ए-सबा महकी महकी

Hasrat Jaipuri

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