मेरे कारोबार में सब ने बड़ी इमदाद की दाद लोगों की गला अपना ग़ज़ल उस्ताद की अपनी साँसें बेच कर मैं ने जिसे आबाद की वो गली जन्नत तो अब भी है मगर शद्दाद की उम्र भर चलते रहे आँखों पे पट्टी बाँध कर ज़िंदगी को ढूँडने में ज़िंदगी बर्बाद की दास्तानों के सभी किरदार कम होने लगे आज काग़ज़ चुनती फिरती है परी बग़दाद की इक सुलगता चीख़ता माहौल है और कुछ नहीं बात करते हो 'यगाना' किस अमीनाबाद की
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
Tehzeeb Hafi
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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शजर हैं अब समर-आसार मेरे चले आते हैं दावेदार मेरे मुहाजिर हैं न अब अंसार मेरे मुख़ालिफ़ हैं बहुत इस बार मेरे यहाँ इक बूँद का मुहताज हूँ मैं समुंदर हैं समुंदर पार मेरे अभी मुर्दों में रूहें फूँक डालें अगर चाहें तो ये बीमार मेरे हवाएँ ओढ़ कर सोया था दुश्मन गए बेकार सारे वार मेरे मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे हँसी में टाल देना था मुझे भी ख़ता क्यूँँ हो गए सरकार मेरे तसव्वुर में न जाने कौन आया महक उट्ठे दर-ओ-दीवार मेरे तुम्हारा नाम दुनिया जानती है बहुत रुस्वा हैं अब अश'आर मेरे भँवर में रुक गई है नाव मेरी किनारे रह गए इस पार मेरे मैं ख़ुद अपनी हिफ़ाज़त कर रहा हूँ अभी सोए हैं पहरे-दार मेरे
Rahat Indori
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यूँँ सदा देते हुए तेरे ख़याल आते हैं जैसे का'बे की खुली छत पे बिलाल आते हैं रोज़ हम अश्कों से धो आते हैं दीवार-ए-हरम पगड़ियाँ रोज़ फ़रिश्तों की उछाल आते हैं हाथ अभी पीछे बंधे रहते हैं चुप रहते हैं देखना ये है तुझे कितने कमाल आते हैं चाँद सूरज मिरी चौखट पे कई सदियों से रोज़ लिक्खे हुए चेहरे पे सवाल आते हैं बे-हिसी मुर्दा-दिली रक़्स शराबें नग़्में बस इसी राह से क़ौमों पे ज़वाल आते हैं
Rahat Indori
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मेरे अश्कों ने कई आँखों में जल-थल कर दिया एक पागल ने बहुत लोगों को पागल कर दिया अपनी पलकों पर सजा कर मेरे आँसू आप ने रास्ते की धूल को आँखों का काजल कर दिया मैं ने दिल दे कर उसे की थी वफ़ा की इब्तिदा उस ने धोका दे के ये क़िस्सा मुकम्मल कर दिया ये हवाएँ कब निगाहें फेर लें किस को ख़बर शोहरतों का तख़्त जब टूटा तो पैदल कर दिया देवताओं और ख़ुदाओं की लगाई आग ने देखते ही देखते बस्ती को जंगल कर दिया ज़ख़्म की सूरत नज़र आते हैं चेहरों के नुक़ूश हम ने आईनों को तहज़ीबों का मक़्तल कर दिया शहर में चर्चा है आख़िर ऐसी लड़की कौन है जिस ने अच्छे-ख़ासे इक शाइ'र को पागल कर दिया
Rahat Indori
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चेहरों की धूप आँखों की गहराई ले गया आईना सारे शहर की बीनाई ले गया डूबे हुए जहाज़ पे क्या तब्सिरा करें ये हादिसा तो सोच की गहराई ले गया हालाँकि बे-ज़बान था लेकिन अजीब था जो शख़्स मुझ से छीन के गोयाई ले गया मैं आज अपने घर से निकलने न पाऊँगा बस इक क़मीस थी जो मिरा भाई ले गया 'ग़ालिब' तुम्हारे वास्ते अब कुछ नहीं रहा गलियों के सारे संग तो सौदाई ले गया
Rahat Indori
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हौसले ज़िंदगी के देखते हैं चलिए कुछ रोज़ जी के देखते हैं नींद पिछली सदी की ज़ख़्मी है ख़्वाब अगली सदी के देखते हैं रोज़ हम इक अँधेरी धुँद के पार क़ाफ़िले रौशनी के देखते हैं धूप इतनी कराहती क्यूँँ है छाँव के ज़ख़्म सी के देखते हैं टुकटुकी बाँध ली है आँखों ने रास्ते वापसी के देखते हैं पानियों से तो प्यास बुझती नहीं आइए ज़हर पी के देखते हैं
Rahat Indori
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