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मोहब्बत का न दुनिया का न दीं का किसी का भी नहीं झूठा कहीं का अभी थी रास्ते में आशनाई स्टेशन आ गया उस महजबीं का किसी का पाँव चूमा हो तो समझो फ़लक से कम नहीं रुतबा ज़मीं का उसे साँपों से ख़ौफ आता है 'अज़हर' बटन लगवाऊँ कैसे आस्तीं का

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था ताले की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था कभी कभी आती थी पहले वस्ल की लज़्ज़त अंदर तक बारिश तिरछी पड़ती थी तो कमरा गीला होता था शुक्र करो तुम इस बस्ती में भी स्कूल खुला वर्ना मर जाने के बा'द किसी का सपना पूरा होता था जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था भले ज़माने थे जब शे'र सुहूलत से हो जाते थे नए सुख़न के नाम पे 'अज़हर' 'मीर' का चर्बा होता था

Azhar Faragh

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कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है इक रिफ़ाक़त में कहाँ उम्र गुज़र सकती है तुझ से कुछ और तअल्लुक़ भी ज़रूरी है मिरा ये मोहब्बत तो किसी वक़्त भी मर सकती है मेरी ख़्वाहिश है कि फूलों से तुझे फ़त्ह करूँँ वर्ना ये काम तो तलवार भी कर सकती है हो अगर मौज में हम जैसा कोई अंधा फ़क़ीर एक सिक्के से भी तक़दीर सँवर सकती है सुब्ह-दम सुर्ख़ उजाला है खुले पानी में चाँद की लाश कहीं से भी उभर सकती है

Azhar Faragh

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जब तलक तेरा सहारा है मुझे गहरा पानी भी किनारा है मुझे आप मौजूद को रद्द करते हैं मेरा मतरूक भी प्यारा है मुझे न भी चमके तो कोई बात नहीं तू तो वैसे ही सितारा है मुझे मिल गई होगी ग़लत बस में नशिस्त जिस ने मंज़िल पे उतारा है मुझे कौन मानेगा मेरे क़ातिल ने बर्फ़ की नोख से मारा है मुझे

Azhar Faragh

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