saaqi sharab la ki tabiat udaas hai mutrib rubab utha ki tabiat udaas hai ruk ruk ke saaz chhed ki dil mutmain nahin tham tham ke mai pila ki tabiat udaas hai chubhti hai qalb o jaan men sitaron ki raushni ai chand duub ja ki tabiat udaas hai mujh se nazar na pher ki barham hai zindagi mujh se nazar mila ki tabiat udaas hai shayad tire labon ki chatak se ho ji bahal ai dost muskura ki tabiat udaas hai hai husn ka fusun bhi ilaj-e-fasurdagi rukh se naqab utha ki tabiat udaas hai main ne kabhi ye zid to nahin ki par aaj shab ai mah-jabin na ja ki tabiat udaas hai imshab gurez-o-ram ka nahin hai koi mahal aghhosh men dar aa ki tabiat udaas hai kaifiyyat-e-sukut se badhta hai aur ghham qissa koi suna ki tabiat udaas hai yunhi durust hogi tabiat tiri 'adam' kam-bakht bhuul ja ki tabiat udaas hai tauba to kar chuka huun magar phir bhi ai 'adam' thoda sa zahr la ki tabiat udaas hai saqi sharab la ki tabiat udas hai mutrib rubab utha ki tabiat udas hai ruk ruk ke saz chhed ki dil mutmain nahin tham tham ke mai pila ki tabiat udas hai chubhti hai qalb o jaan mein sitaron ki raushni ai chand dub ja ki tabiat udas hai mujh se nazar na pher ki barham hai zindagi mujh se nazar mila ki tabiat udas hai shayad tere labon ki chatak se ho ji bahaal ai dost muskura ki tabiat udas hai hai husn ka fusun bhi ilaj-e-fasurdagi rukh se naqab utha ki tabiat udas hai main ne kabhi ye zid to nahin ki par aaj shab ai mah-jabin na ja ki tabiat udas hai imshab gurez-o-ram ka nahin hai koi mahal aaghosh mein dar aa ki tabiat udas hai kaifiyyat-e-sukut se badhta hai aur gham qissa koi suna ki tabiat udas hai yunhi durust hogi tabiat teri 'adam' kam-bakht bhul ja ki tabiat udas hai tauba to kar chuka hun magar phir bhi ai 'adam' thoda sa zahr la ki tabiat udas hai
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
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जब तिरे नैन मुस्कुराते हैं ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं क्यूँँ शिकन डालते हो माथे पर भूल कर आ गए हैं जाते हैं कश्तियाँ यूँँ भी डूब जाती हैं नाख़ुदा किस लिए डराते हैं इक हसीं आँख के इशारे पर क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
Abdul Hamid Adam
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हँस के बोला करो बुलाया करो आप का घर है आया जाया करो मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर मुस्कुराना न भूल जाया करो हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूटी क़स्में ज़रूर खाया करो ताकि दुनिया की दिलकशी न घटे नित-नए पैरहन में आया करो कितने सादा-मिज़ाज हो तुम 'अदम' उस गली में बहुत न जाया करो
Abdul Hamid Adam
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हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया वो ख़ुद पिला रहे थे मैं लहरा के पी गया तौबा के टूटने का भी कुछ कुछ मलाल था थम थम के सोच सोच के शर्मा के पी गया साग़र-ब-दस्त बैठी रही मेरी आरज़ू साक़ी शफ़क़ से जाम को टकरा के पी गया वो दुश्मनों के तंज़ को ठुकरा के पी गए मैं दोस्तों के ग़ैज़ को भड़का के पी गया सदहा मुतालिबात के बा'द एक जाम-ए-तल्ख़ दुनिया-ए-जब्र-ओ-सब्र को धड़का के पी गया सौ बार लग़्ज़िशों की क़सम खा के छोड़ दी सौ बार छोड़ने की क़सम खा के पी गया पीता कहाँ था सुब्ह-ए-अज़ल मैं भला 'अदम' साक़ी के ए'तिबार पे लहरा के पी गया
Abdul Hamid Adam
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