samundaron ke darmiyan so gae thake hue jahaz-ran so gae daricha ek haule haule khul gaya jab us gali ke sab makan so gae sulagti dopahar men sab dukan-dar khuli hi chhod kar dukan so gae phir aaj ik sitara jagta raha phir aaj saat asman so gae hava chali khule samundaron ke biich thakan se chuur badban so gae sahar hui to regzar jaag utha magar tamam sarban so gae us aankh ki panah ab nahin nasib palak palak vo saeban so gae 'jamal' akhir aisi adaten bhi kya ki ghar men shaam hi se aan so gae samundaron ke darmiyan so gae thake hue jahaz-ran so gae daricha ek haule haule khul gaya jab us gali ke sab makan so gae sulagti dopahar mein sab dukan-dar khuli hi chhod kar dukan so gae phir aaj ek sitara jagta raha phir aaj sat aasman so gae hawa chali khule samundaron ke bich thakan se chur baadban so gae sahar hui to regzar jag utha magar tamam sarban so gae us aankh ki panah ab nahin nasib palak palak wo saeban so gae 'jamal' aakhir aisi aadaten bhi kya ki ghar mein sham hi se aan so gae
Related Ghazal
जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो अब इतनी देर भी ना लगा, ये हो ना कहीं तू आ चुका हो और तेरा इंतिज़ार हो मैं फूल हूँ तो फिर तेरे बालो में क्यूँ नहीं हूँ तू तीर है तो मेरे कलेजे के पार हो एक आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर ‘हाफ़ी’ तुम आदमी तो बहुत शानदार हो
Tehzeeb Hafi
268 likes
मेरे दिल में ये तेरे सिवा कौन है? तू नहीं है तो तेरी जगह कौन है? हम मोहब्बत में हारे हुए लोग हैं और मोहब्बत में जीता हुआ कौन है? मेरे पहलू से उठ के गया कौन है? तू नहीं है तो तेरी जगह कौन है? तू ने जाते हुए ये बताया नहीं मैं तेरा कौन हूँ तू मेरा कौन है
Tehzeeb Hafi
145 likes
मुझ ऐसे शख़्स से रिश्ता नहीं निकाल सका वो अपने हुस्न का सदक़ा नहीं निकाल सका मैं मिल रहा था उसे बा'द एक मुद्दत के सो उस सेे कोई भी रिश्ता नहीं निकाल सका तेरे लिए तो मुझे ज़िंदगी भी कम थी मगर मेरे लिए तो तू लम्हा नहीं निकाल सका तू देख पाई नहीं मुझ को ख़त्म होते हुए मैं तेरी आँख का कचरा नहीं निकाल सका इक ऐसी बात का ग़ुस्सा है मेरे लहजे में वो बात जिस का मैं ग़ुस्सा नहीं निकाल सका
Vikram Gaur Vairagi
33 likes
सारे का सारा तो मेरा भी नहीं और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं ग़ौर से देखने पे बोली है शादी से पहले सोचना भी नहीं अच्छी सेहत का है मेरा महबूब धोखे देते हुए थका भी नहीं जितना बर्बाद कर दिया तू ने उतना आबाद तो मैं था भी नहीं मुझ को बस इतना दीन आता है जहाँ मैं ख़ुद नहीं ख़ुदा भी नहीं
Kushal Dauneria
43 likes
हाँ ये सच है कि मोहब्बत नहीं की दोस्त बस मेरी तबीयत नहीं की इस लिए गांव मैं सैलाब आया हम ने दरियाओ की इज़्ज़त नहीं की जिस्म तक उस ने मुझे सौंप दिया दिल ने इस पर भी कनायत नहीं की मेरे ए'जाज़ में रखी गई थी मैं ने जिस बज़्म में शिरकत नहीं की याद भी याद से रखा उस को भूल जाने में भी गफलत नहीं की उस को देखा था अजब हालत में फिर कभी उस की हिफाज़त नहीं की हम अगर फतह हुए है तो क्या इश्क़ ने किस पे हकूमत नहीं की
Tehzeeb Hafi
74 likes
More from Jamal Ehsani
'जमाल' अब तो यही रह गया पता उस का भली सी शक्ल थी अच्छा सा नाम था उस का फिर एक साया दर-ओ-बाम पर उतर आया दिल-ओ-निगाह में फिर ज़िक्र छिड़ गया उस का किसे ख़बर थी कि ये दिन भी देखना होगा अब ए'तिबार भी दिल को नहीं रहा उस का जो मेरे ज़िक्र पर अब क़हक़हे लगाता है बिछड़ते वक़्त कोई हाल देखता उस का मुझे तबाह किया और सब की नज़रों में वो बे-क़ुसूर रहा ये कमाल था उस का सो किस से कीजिए ज़िक्र-नज़ाकत-ए-ख़द-ओ-ख़ाल कोई मिला ही नहीं सूरत-आश्ना उस का जो साया साया शब-ओ-रोज़ मेरे साथ रहा गली गली में पता पूछता फिरा उस का 'जमाल' उस ने तो ठानी थी उम्र-भर के लिए ये चार रोज़ में क्या हाल हो गया उस का
Jamal Ehsani
6 likes
वो लोग मेरे बहुत प्यार करने वाले थे गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे नई रुतों में दुखों के भी सिलसिले हैं नए वो ज़ख़्म ताज़ा हुए हैं जो भरने वाले थे ये किस मक़ाम पे सूझी तुझे बिछड़ने की कि अब तो जा के कहीं दिन सँवरने वाले थे हज़ार मुझ से वो पैमान-ए-वस्ल करता रहा पर उस के तौर-तरीक़े मुकरने वाले थे तुम्हें तो फ़ख़्र था शीराज़ा-बंदी-ए-जाँ पर हमारा क्या है कि हम तो बिखरने वाले थे तमाम रात नहाएा था शहर बारिश में वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे उस एक छोटे से क़स्बे पे रेल ठहरी नहीं वहाँ भी चंद मुसाफ़िर उतरने वाले थे
Jamal Ehsani
16 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Jamal Ehsani.
Similar Moods
More moods that pair well with Jamal Ehsani's ghazal.







