यूँँ ख़ामोश बैठे किस उलझन में हो इनकार है या इकरार है बता दो हमें मोहब्बत हम ने की है तुम सेे गर इश्क़ ख़ता है तो सज़ा दो हमें मरता नहीं इस जहाँ में कोई किसी के बगैर गर ज़िंदा हो तो इत्तिला दो हमें सुना है हमारे ख़तों को जला दिए तुम ने गर जला सको तो जला दो हमें ये जो दुनिया इश्क़ के खिलाफ है, कहाँ है? ऐलान-ए-जंग करनी है , कोई पता दो हमें लड़ाई मुश्किल है तो क्या, हौसले बुलंद हैं बात आजमाइश की है तो आज़मा लो हमें
Related Ghazal
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
244 likes
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
232 likes
कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
Tehzeeb Hafi
435 likes
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें
Ahmad Faraz
130 likes
उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
107 likes
More from Shashank Tripathi
ज़िन्दगी में इश्क़ का अधूरापन भी झूठा है मेहबूब के ना होने का सूनापन भी झूठा है गर जो हो जाता है भूले से भी दीदार उस का उसे देख लेने का उतावलापन भी झूठा है महफ़िल में भी खोए रहते हो उस की यादों में यार की यादों का ये अकेलापन भी झूठा है मोहब्बत की ख़ातिर कैसे पागल से फिरते हैं ये आशिकों के प्यार का आवारापन भी झूठा है कुछ मजबूरियाँ रहीं होंगी उस की जो चला गया उस सेे नफ़रत करने का ये दिखावापन भी झूठा है कभी जो फ़ुर्सत मिले तो ख़ुद से भी मिल लेना समझ जाओगे "निहार", ये दीवानापन भी झूठा है
Shashank Tripathi
0 likes
तुम जो अब लौट आओ तो कुछ बात बने दिल से दिल का हाल बताओ तो कुछ बात बने बहुत तन्हा कट रहा है ये ज़िन्दगी का सफ़र मेरे कदम से कदम मिलाओ तो कुछ बात बने मेरे हिस्से में नहीं कुछ फकत अंधेरे के सिवा तुम जो इक दिया जलाओ तो कुछ बात बने मेरे ही ख़्वाबों के टुकड़े आँखों में चुभने लगे हैं तुम कोई नया ख़्वाब दिखाओ तो कुछ बात बने इंसां के घरों के दरवाज़ों ने परिंदों को बेघर कर दिया "निहार" हर रोज़ इक पौधा लगाओ तो कुछ बात बने
Shashank Tripathi
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shashank Tripathi.
Similar Moods
More moods that pair well with Shashank Tripathi's ghazal.







