ghazalKuch Alfaaz

ज़िन्दगी में इश्क़ का अधूरापन भी झूठा है मेहबूब के ना होने का सूनापन भी झूठा है गर जो हो जाता है भूले से भी दीदार उस का उसे देख लेने का उतावलापन भी झूठा है महफ़िल में भी खोए रहते हो उस की यादों में यार की यादों का ये अकेलापन भी झूठा है मोहब्बत की ख़ातिर कैसे पागल से फिरते हैं ये आशिकों के प्यार का आवारापन भी झूठा है कुछ मजबूरियाँ रहीं होंगी उस की जो चला गया उस सेे नफ़रत करने का ये दिखावापन भी झूठा है कभी जो फ़ुर्सत मिले तो ख़ुद से भी मिल लेना समझ जाओगे "निहार", ये दीवानापन भी झूठा है

Related Ghazal

यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

526 likes

क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

371 likes

उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

465 likes

सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?

Zubair Ali Tabish

140 likes

ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

355 likes

More from Shashank Tripathi

यूँँ ख़ामोश बैठे किस उलझन में हो इनकार है या इकरार है बता दो हमें मोहब्बत हम ने की है तुम सेे गर इश्क़ ख़ता है तो सज़ा दो हमें मरता नहीं इस जहाँ में कोई किसी के बगैर गर ज़िंदा हो तो इत्तिला दो हमें सुना है हमारे ख़तों को जला दिए तुम ने गर जला सको तो जला दो हमें ये जो दुनिया इश्क़ के खिलाफ है, कहाँ है? ऐलान-ए-जंग करनी है , कोई पता दो हमें लड़ाई मुश्किल है तो क्या, हौसले बुलंद हैं बात आजमाइश की है तो आज़मा लो हमें

Shashank Tripathi

0 likes

तुम जो अब लौट आओ तो कुछ बात बने दिल से दिल का हाल बताओ तो कुछ बात बने बहुत तन्हा कट रहा है ये ज़िन्दगी का सफ़र मेरे कदम से कदम मिलाओ तो कुछ बात बने मेरे हिस्से में नहीं कुछ फकत अंधेरे के सिवा तुम जो इक दिया जलाओ तो कुछ बात बने मेरे ही ख़्वाबों के टुकड़े आँखों में चुभने लगे हैं तुम कोई नया ख़्वाब दिखाओ तो कुछ बात बने इंसां के घरों के दरवाज़ों ने परिंदों को बेघर कर दिया "निहार" हर रोज़ इक पौधा लगाओ तो कुछ बात बने

Shashank Tripathi

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Shashank Tripathi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Shashank Tripathi's ghazal.