ज़िन्दगी में इश्क़ का अधूरापन भी झूठा है मेहबूब के ना होने का सूनापन भी झूठा है गर जो हो जाता है भूले से भी दीदार उस का उसे देख लेने का उतावलापन भी झूठा है महफ़िल में भी खोए रहते हो उस की यादों में यार की यादों का ये अकेलापन भी झूठा है मोहब्बत की ख़ातिर कैसे पागल से फिरते हैं ये आशिकों के प्यार का आवारापन भी झूठा है कुछ मजबूरियाँ रहीं होंगी उस की जो चला गया उस सेे नफ़रत करने का ये दिखावापन भी झूठा है कभी जो फ़ुर्सत मिले तो ख़ुद से भी मिल लेना समझ जाओगे "निहार", ये दीवानापन भी झूठा है
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?
Zubair Ali Tabish
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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यूँँ ख़ामोश बैठे किस उलझन में हो इनकार है या इकरार है बता दो हमें मोहब्बत हम ने की है तुम सेे गर इश्क़ ख़ता है तो सज़ा दो हमें मरता नहीं इस जहाँ में कोई किसी के बगैर गर ज़िंदा हो तो इत्तिला दो हमें सुना है हमारे ख़तों को जला दिए तुम ने गर जला सको तो जला दो हमें ये जो दुनिया इश्क़ के खिलाफ है, कहाँ है? ऐलान-ए-जंग करनी है , कोई पता दो हमें लड़ाई मुश्किल है तो क्या, हौसले बुलंद हैं बात आजमाइश की है तो आज़मा लो हमें
Shashank Tripathi
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तुम जो अब लौट आओ तो कुछ बात बने दिल से दिल का हाल बताओ तो कुछ बात बने बहुत तन्हा कट रहा है ये ज़िन्दगी का सफ़र मेरे कदम से कदम मिलाओ तो कुछ बात बने मेरे हिस्से में नहीं कुछ फकत अंधेरे के सिवा तुम जो इक दिया जलाओ तो कुछ बात बने मेरे ही ख़्वाबों के टुकड़े आँखों में चुभने लगे हैं तुम कोई नया ख़्वाब दिखाओ तो कुछ बात बने इंसां के घरों के दरवाज़ों ने परिंदों को बेघर कर दिया "निहार" हर रोज़ इक पौधा लगाओ तो कुछ बात बने
Shashank Tripathi
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