तुम जो अब लौट आओ तो कुछ बात बने दिल से दिल का हाल बताओ तो कुछ बात बने बहुत तन्हा कट रहा है ये ज़िन्दगी का सफ़र मेरे कदम से कदम मिलाओ तो कुछ बात बने मेरे हिस्से में नहीं कुछ फकत अंधेरे के सिवा तुम जो इक दिया जलाओ तो कुछ बात बने मेरे ही ख़्वाबों के टुकड़े आँखों में चुभने लगे हैं तुम कोई नया ख़्वाब दिखाओ तो कुछ बात बने इंसां के घरों के दरवाज़ों ने परिंदों को बेघर कर दिया "निहार" हर रोज़ इक पौधा लगाओ तो कुछ बात बने
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?
Zubair Ali Tabish
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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ सारे मर्द एक जैसे हैं तुम ने कैसे कह डाला मैं भी तो एक मर्द हूँ तुम को ख़ुद से बेहतर मानता हूँ मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ
Ali Zaryoun
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हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते जान होती तो मिरी जान लुटाते जाते अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत कर के जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते रेंगने की भी इजाज़त नहीं हम को वर्ना हम जिधर जाते नए फूल खिलाते जाते मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते मुझ को रोने का सलीक़ा भी नहीं है शायद लोग हँसते हैं मुझे देख के आते जाते हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते
Rahat Indori
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ज़िन्दगी में इश्क़ का अधूरापन भी झूठा है मेहबूब के ना होने का सूनापन भी झूठा है गर जो हो जाता है भूले से भी दीदार उस का उसे देख लेने का उतावलापन भी झूठा है महफ़िल में भी खोए रहते हो उस की यादों में यार की यादों का ये अकेलापन भी झूठा है मोहब्बत की ख़ातिर कैसे पागल से फिरते हैं ये आशिकों के प्यार का आवारापन भी झूठा है कुछ मजबूरियाँ रहीं होंगी उस की जो चला गया उस सेे नफ़रत करने का ये दिखावापन भी झूठा है कभी जो फ़ुर्सत मिले तो ख़ुद से भी मिल लेना समझ जाओगे "निहार", ये दीवानापन भी झूठा है
Shashank Tripathi
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यूँँ ख़ामोश बैठे किस उलझन में हो इनकार है या इकरार है बता दो हमें मोहब्बत हम ने की है तुम सेे गर इश्क़ ख़ता है तो सज़ा दो हमें मरता नहीं इस जहाँ में कोई किसी के बगैर गर ज़िंदा हो तो इत्तिला दो हमें सुना है हमारे ख़तों को जला दिए तुम ने गर जला सको तो जला दो हमें ये जो दुनिया इश्क़ के खिलाफ है, कहाँ है? ऐलान-ए-जंग करनी है , कोई पता दो हमें लड़ाई मुश्किल है तो क्या, हौसले बुलंद हैं बात आजमाइश की है तो आज़मा लो हमें
Shashank Tripathi
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