तेरे नौ-ख़ेज़ आवेज़े ये दिल-आवेज़ आवेज़े ज़रा सा तुम जो रुकती हो पलट कर मुस्कुराती हो तेरे गालों को छूते हैं शरारत ख़ेज़ आवेज़े तुझे पाने की ख़्वाहिश को करें महमेज़ आवेज़े सितम-अंगेज़ आवेज़े ये दिल-आवेज़ आवेज़े
Related Nazm
तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
117 likes
"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
70 likes
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे बे-रात ढले शमा' बुझाता नहीं कोई साक़ी से गिला था तुम्हें मय-ख़ाने से शिकवा अब ज़हरस भी प्यास बुझाता नहीं कोई हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना क्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के नाज़-ए-दिल-ए-बेताब उठाता नहीं कोई
Kaifi Azmi
42 likes
याद है एक दिन? मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे सिगरेट की डिबिया पर तुम ने एक स्केच बनाया था आ कर देखो उस पौधे पर फूल आया है.
Gulzar
37 likes
उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........
Varun Anand
475 likes
More from Naeem Zarrar Ahmad
किसी के फ़र्ज़ करने से अगर फ़ितरत बदल सकती तो फिर शायद मोहब्बत जीत सकती थी
Naeem Zarrar Ahmad
0 likes
ये हमारी क़िस्मत के जितने भी सितारे हैं क़ुदरत-ए-इलाही ने बे-मुराद रस्तों पर बाँध कर उतारे हैं जिन की अपनी मंज़िल ही बे-निशान रस्ते हों रौशनी जो ग़ैरों से मुस्तआ'र लेते हों कैसे मैं यक़ीं कर लूँ मेरी मंज़िलों के वो मो'तबर इशारे हैं ये हमारी क़िस्मत के जितने भी सितारे हैं सिर्फ़ इस्तिआ'रे हैं
Naeem Zarrar Ahmad
0 likes
अगर तुम फ़र्ज़ कर लो तुम मेरे कार-ए-नशात-ओ-वस्ल का यकता ज़रीया हो तुम्हारे हुस्न की पुर-पेच गलियों का मैं इक तन्हा मुसाफ़िर हूँ हमें हर रोज़ मश्क़-ए-वस्ल के हैजान से हो कर नई मंज़िल को पाना है नई मस्ती का इक सैलाब लाना है और उस सैलाब में सारे जहाँ को डूब जाना है मैं वाक़िफ़ हूँ कि ये मुमकिन नहीं लेकिन अगर तुम फ़र्ज़ कर लो
Naeem Zarrar Ahmad
0 likes
मोहब्बत ज़िंदगी है मोहब्बत दिल की तीरा साअ'तों में रौशनी है ये वीरानों में ख़ुद-रौ नग़्मगी है मोहब्बत जुरअत-ए-इज़हार है किरदार है मोहब्बत दीदा-ए-बेदार है पिंदार है ईसार है मोहब्बत जान देती है मोहब्बत मान देती है मोहब्बत बे-निशाँ रिश्तों को भी पहचान देती है मोहब्बत अक़्ल भी है मोहब्बत मावरा-ए-अक़्ल भी है मोहब्बत हिज्र भी है वस्ल भी है मोहब्बत पेश-रफ़्त-ए-नस्ल भी है मोहब्बत ज़ख़्म पर मरहम मोहब्बत सर-बसर तरह्हुम मोहब्बत मोहतरम सच का इल्म ज़ोर-ए-क़लम मोहब्बत काविश-ए-पैहम मोहब्बत राज़ यज़्दाँ खोलती है मोहब्बत ज़र्फ़-ए-आदम तोलती है मोहब्बत ख़ामुशी में बोलती है मोहब्बत आरज़ू है जुस्तुजू है रंग-ओ-बू है मोहब्बत जीत कर मिटने की ख़ू है मोहब्बत हार कर भी सुर्ख़-रू है मोहब्बत इब्तिदा है इंतिहा है मोहब्बत बाइ'स-ए-अर्ज़-ओ-समा है मोहब्बत में ख़ुदा भी मुब्तला है
Naeem Zarrar Ahmad
0 likes
एक अजीब ख़्वाहिश है इस ज़मीं के कोने में सिर्फ़ मह-जबीनों की सब की सब हसीनों की अपनी एक बस्ती हो ज़िंदगी जहाँ हर पल खिलखिला के हँसती हो रंग-ओ-नूर की बारिश हर घड़ी बरसती हो सब ग़ज़ाल-नैनों में शोख़ सी शरारत हो इन की जुम्बिश-ए-लब से ज़िंदगी इबारत हो ख़ुशियों का झमेला हो पलकों पे सितारे हों रौशनी का रेला हो ख़ुशबुओं का मेला हो और मह-जबीनों की इस हसीन बस्ती में एक सिर्फ़ मेरा ही चूड़ियों का ठेला हो
Naeem Zarrar Ahmad
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Naeem Zarrar Ahmad.
Similar Moods
More moods that pair well with Naeem Zarrar Ahmad's nazm.







