“हमारा मिलना” जब तुम मुझ सेे मिलने आती थी मैं कितना बेसब्री से इंतिज़ार करता था जब तुम मेरे पास आ जाती थी मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगता था जब तुम पास मेरे बैठा करती थी मैं बस तुम को ही देखता रहता था तुम धी में से मुस्कराया करती थी तुम उस वक़्त बहुत ही प्यारी लगती थी ऐसा लगता था ये लम्हा यहीं थम जाए मैं धीरे से तुम सेे बोला करता था तुम प्यार से जवाब दिया करती थी जब मैं नाराज़ हो जाता था तब तुम मुझे प्यार से मनाती थी मैं तुम सेे न जाने क्या क्या पूछता था तुम सब कुछ प्यार से समझाती थी तुम कितने शांत सी बैठा करती थी मैं कितना परेशान किया करता था जब तुम प्यार से गाल को चूमती थी मुझे बहुत बहुत बहुत अच्छा लगता था तुम बस एक घंटे के लिए आया करती थी मैं तुम्हारे होंठों को कितनी बार चूमता था तुम कभी कभी मेरी गोद में बैठा करती थी मेरा मोबाइल बच्चों की तरह चलाया करती थी जब तुम घर को वापस जाया करती थी मैं तुम को देर तक गले लगाता था तुम ख़ुद को मुझ सेे छुड़ाया करती थी मैं कस कर तुम को पकड़े रखता था जब तुम मुझ सेे मिलने आया करती थी कितनी प्यारी प्यारी बातें किया करते थे मन करता है वो लम्हें वो यादें वो दिन फिर से आ जाए फिर से हम वही शा में वही दिन वही मुलाक़ातें वही ज़िन्दगी जिएँ
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इक ख़त मुझे लिखना है दिल्ली में बसे दिल को इक दिन मुझे चखना है खाजा तेरी नगरी का खुसरो तेरी चौखट से इक शब मुझे पीनी है शीरीनी सुख़नवाली ख़ुशबू ए वतन वाली ग़ालिब तेरे मरकद को इक शे'र सुनाना है इक सांवली रंगत को चुपके से बताना है मैं दिल भी हूँ दिल्ली भी उर्दू भी हूँ हिन्दी भी इक ख़त मुझे लिखना है मुमकिन है कभी लिक्खूँ मुमकिन है अभी लिक्खूँ
Ali Zaryoun
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उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........
Varun Anand
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मुर्शिद मुर्शिद प्लीज़ आज मुझे वक़्त दीजिये मुर्शिद मैं आज आप को दुखड़े सुनाऊँगा मुर्शिद हमारे साथ बड़ा ज़ुल्म हो गया मुर्शिद हमारे देश में इक जंग छिड़ गई मुर्शिद सभी शरीफ़ शराफ़त से मर गए मुर्शिद हमारे ज़ेहन गिरफ़्तार हो गए मुर्शिद हमारी सोच भी बाज़ारी हो गई मुर्शिद हमारी फौज क्या लड़ती हरीफ़ से मुर्शिद उसे तो हम से ही फ़ुर्सत नहीं मिली मुर्शिद बहुत से मार के हम ख़ुद भी मर गए मुर्शिद हमें ज़िरह नहीं तलवार दी गई मुर्शिद हमारी ज़ात पे बोहतान चढ़ गए मुर्शिद हमारी ज़ात पलांदों में दब गई मुर्शिद हमारे वास्ते बस एक शख़्स था मुर्शिद वो एक शख़्स भी तक़दीर ले उड़ी मुर्शिद ख़ुदा की ज़ात पे अंधा यक़ीन था अफ़्सोस अब यक़ीन भी अंधा नहीं रहा मुर्शिद मोहब्बतों के नताइज कहाँ गए मुर्शिद मेरी तो ज़िन्दगी बर्बाद हो गई मुर्शिद हमारे गाँव के बच्चों ने भी कहा मुर्शिद कूँ आखि आ के सदा हाल देख वजं मुर्शिद हमारा कोई नहीं एक आप हैं ये मैं भी जानता हूँ के अच्छा नहीं हुआ मुर्शिद मैं जल रहा हूँ हवाएँ न दीजिये मुर्शिद अज़ाला कीजिए दुआएँ न दीजिये मुर्शिद ख़मोश रह के परेशाँ न कीजिए मुर्शिद मैं रोना रोते हुए अंधा हो गया और आप हैं के आप को एहसास तक नहीं हह! सब्र कीजे सब्र का फ़ल मीठा होता है मुर्शिद मैं भौंकदै हाँ जो कई शे वि नहीं बची मुर्शिद वहाँ यज़ीदियत आगे निकल गई और पारसा नमाज़ के पीछे पड़े रहे मुर्शिद किसी के हाथ में सब कुछ तो है मगर मुर्शिद किसी के हाथ में कुछ भी नहीं रहा मुर्शिद मैं लड़ नहीं सका पर चीख़ता रहा ख़ामोश रह के ज़ुल्म का हामी नहीं बना मुर्शिद जो मेरे यार भला छोड़ें रहने दें अच्छे थे जैसे भी थे ख़ुदा उन को ख़ुश रखें मुर्शिद हमारी रौनकें दूरी निगल गई मुर्शिद हमारी दोस्ती सुब्हात खा गए मुर्शिद ऐ फोटो पिछले महीने छिकाया हम हूँ मेकुं देख लगदा ऐ जो ऐ फोटो मेदा ऐ ये किस ने खेल खेल में सब कुछ उलट दिया मुर्शिद ये क्या के मर के हमें ज़िन्दगी मिले मुर्शिद हमारे विरसे में कुछ भी नहीं सो हम बेमौसमी वफ़ात का दुख छोड़ जाएँगे मुर्शिद किसी की ज़ात से कोई गिला नहीं अपना नसीब अपनी ख़राबी से मर गया मुर्शिद वो जिस के हाथ में हर एक चीज़ है शायद हमारे साथ वही हाथ कर गया मुर्शिद दुआएँ छोड़ तेरा पोल खुल गया तू भी मेरी तरह है तेरे बस में कुछ नहीं इंसान मेरा दर्द समझ सकते ही नहीं मैं अपने सारे ज़ख़्म ख़ुदा को दिखाऊँगा ऐ रब्बे काइनात! इधर देख मैं फ़कीर जो तेरी सरपरस्ती में बर्बाद हो गया परवरदिगार बोल कहाँ जाएँ तेरे लोग तुझ तक पहुँचने को भी वसीला ज़रूरी है परवरदिगार आवे का आवा बिगड़ गया ये किस को तेरे दीन के ठेके दिए गए हर शख़्स अपने बाप के फिरके में बंद है परवरदिगार तेरे सहीफे नहीं खुले कुछ और भेज तेरे गुज़िश्ता सहीफों से मक़सद ही हल हुए हैं मसाइल नहीं हुए जो हो गया सो हो गया, अब मुख़्तियारी छीन परवरदिगार अपने ख़लीफे को रस्सी डाल जो तेरे पास वक़्त से पहले पहुँच गए परवरदिगार उन के मसाइल का हल निकाल परवरदिगार सिर्फ़ बना देना काफ़ी नइँ तख़्लीक कर के दे तो फिर देखभाल कर हम लोग तेरी कुन का भरम रखने आए हैं परवरदिगार यार! हमारा ख़याल कर
Afkar Alvi
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मैं सपनों में ऑक्सीजन प्लांट इंस्टॉल कर रहा हूँ और हर मरने वाले के साथ मर रहा हूँ मैं अपने लफ़्ज़ों के जरिए तुम्हें साँसों के सिलेंडर भेजूँगा जो तुम्हें इस जंग में हारने नहीं देंगे और तुम्हारी देखभाल करने वालों के हाथों को काँपने नहीं देंगे ऑक्सीजन स्टॉक ख़त्म होने की ख़बरें गर्दिश भी करें तो क्या मैं तुम्हारे लिए अपनी नज़्मों से वेंटीलेटर बनाऊँगा अस्पतालों के बिस्तर भर भी जाएँ कुछ लोग तुम सेे बिछड़ भी जाएँ तो हौसला मत हारना क्यूँँकि रात चाहे जितनी मर्ज़ी काली हो गुज़र जाने के लिए होती है रंग उतर जाने के लिए होते हैं और ज़ख़्म भर जाने के होते हैं
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है
Kumar Vishwas
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नज़्म: उस की याद मेरा कमरा उस की याद दिलाता है वो जब भी आती है पहले गले लगाती है मैं बस उस का इंतिज़ार करता हूँ वो है कि इतनी दूर से आती है मैं बस उस को देखता रहता हूँ वो मुझ को सब कुछ समझाती है मैं बस उस की हाँ में हाँ मिलाता हूँ वो मुझ को सब कुछ बताती है मैं तो बस उस को छूना चाहता हूँ वो मुझ को बोसा देकर जाती है मैं तो बस उस को जाते हुए देखता हूँ वो है कि उसे तो जाना भी होता है मैं हूँ कि मैं कुछ नहीं करता हूँ वो है कि उसे सब कुछ करना होता है मुझे तो बस नाराज़ होना होता है उसे तो रिश्ता भी बचाना होता है मेरा कमरा उस की याद दिलाता है वो जब भी आती है पहले गले लगाती है
Rohit ydv
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"काश" काश तुम को बता पाता तुम्हें कितना प्यार करता हूँ कितना सोचता हूँ कितना चाहता हूँ काश तुम्हें मैसेज कर सकता कॉल कर सकता तुम्हें मना पाता तुम्हारे पास आ पाता काश तुम्हें पास बुला के समझा पाता डाँट कर तुम्हें गले लगा पाता तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सँभाल पाता तुम्हारे होंठों को चूम पाता काश बता पाता कितना प्यार करता हूँ कितना डरता हूँ तुम्हें खोने से कितना परेशान करती हो तुम कितना लड़ती हो तुम कितना सताती हैं तुम्हारी यादें काश बता पता कितनी ख़ूब-सूरत हो तुम तुम्हारे गाल पर वो तिल तुम्हारे गर्दन का वो तिल तुम्हारे काले बाल तुम्हारी काली आँखें तुम्हारी लंबी ज़ुल्फ़ें काश तुम्हें बता पता कितना प्यार करता हूँ तुम्हें
Rohit ydv
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"ज़िंदगी उस के साथ" हम उस के साथ जीना चाहते हैं हमें उस के साथ ज़िंदगी जीना है हम उस के साथ रहना चाहते हैं हमें उस की यादों में जीना है हम उस के साथ खोना चाहते हैं हमें उस के ख़्वाबों में खोना है हम उस के साथ बैठना चाहते हैं हमें उस की आँखों में डूबना है हम उस के साथ खेलना चाहते हैं हमें उस की ज़ुल्फ़ों से खेलना है हम उस के बालों को चेहरे से हटाना चाहते हैं हमें उस के गर्दन के तिल को देखना है हम उस के साथ मुस्कुराना चाहते हैं हमें उस का चेहरा देख कर मुस्कुराना है हम उस के साथ शादी करना चाहते हैं हमें उस को अपनी दुल्हन बनाना है हम उस के साथ खाना बनाना चाहते हैं हमें उस के हाथों से बना खाना है हम उस के साथ खाना चाहते हैं हमें उस के नाज़ुक हाथों से खाना है हम उस के साथ शा में बिताना चाहते हैं हमें उस के साथ चाँद को देखना है हम उस के साथ चलना चाहते हैं हमें उस का हाथ पकड़ कर चलना है हम उस के होंठों को चूम कर जाना चाहते हैं हमें उस के हाथों से मीठा खाके जाना है हम उस के साथ सोना चाहते हैं हमें उस की बाँहों में सोना है हम उस के साथ उठना चाहते हैं हमें उस का चेहरे देख कर उठना है हम उस के साथ चाय पीना चाहते हैं हमें उस के गाल को चूम कर पीना है हम उस के साथ कुछ ख़रीदना चाहते हैं हमें उस के लिए झुमका पायल साड़ी सब ख़रीदना है हम उस के साथ चुप रहना चाहते हैं हमें उस की गोद में सर रख कर दुख बाँटना है हम उस के साथ गले लगना चाहते हैं हमें उस के आते ही उस का माथा चूमना है हम उस के साथ घंटो बातें करना चाहते हैं हमें उस को गोद में बिठा कर उस की बातें सुनना है हम उस के साथ तैयार होना चाहते हैं हमें उस को साड़ी बिंदी में देखना है हम उस सेे साथ लड़ना चाहते हैं हमें उस को परेशान कर के मनाना है हम उस के साथ नाम बनाना चाहते हैं हमें उस के नाम से अपना नाम जोड़ना है हम उस के साथ जीना चाहते हैं हमें उस के साथ ज़िंदगी जीना है
Rohit ydv
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