nazmKuch Alfaaz

ख़याल कुछ यूँँ बिलखते हैं सीने में जैसे गुनाह पिघलते हों जैसे लफ़्ज़ चटकते हों जैसे रूहें बिछड़ती हों जैसे लाशें फंफनाती हों जैसे लम्स खुरदुरे हों जैसे लब दरदरे हों जैसे कोई बदन कतरता हो जैसे कोई समन कचरता हो ख़याल तेरे कुछ यूँँ बिलखते हैं सीने में

Related Nazm

तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

117 likes

"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

70 likes

मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

52 likes

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे बे-रात ढले शमा' बुझाता नहीं कोई साक़ी से गिला था तुम्हें मय-ख़ाने से शिकवा अब ज़हरस भी प्यास बुझाता नहीं कोई हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना क्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के नाज़-ए-दिल-ए-बेताब उठाता नहीं कोई

Kaifi Azmi

42 likes

मुझ को इतने से काम पे रख लो जब भी सीने में झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उस को जब भी आवेज़ा उलझे बालों में मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो 'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।' जब ग़रारे में पाँव फँस जाए या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके इक नज़र देख लो तो काफ़ी है 'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा मुझ को इतने से काम पे रख लो

Gulzar

68 likes

More from Varsha Gorchhia

किस धुन में रहती हो तुम उलझे हुए बालों की गिर्हें तुम से नहीं सुलझती क्या लाओ इन्हें मैं सुलझा दूँ ऊन के उलझे गुच्छों से ये बाल तुम्हारे सुलझे तो रेशम हो जाएँ और बालों को सुलझाने के बहाने जीवन की उलझन सुलझाऊँ घने बनों में शंख बजाऊँ और तितली बन कर उड़ जाऊँ शाख़ों को मैं रक़्स दिखाऊँ एक काग़ज़ की नाव बनाऊँ तुझ को दूर बहा ले जाऊँ और तेरे दुख की वर्षा में अंतर्मन तक भीगती जाऊँ आ अजनबी सी लड़की मैं तेरी बचपन की सी सहेली हो जाऊँ

Varsha Gorchhia

1 likes

सुनो न कहीं से कोई कार्बन-पेपर ले आओ ख़ूब-सूरत उस वक़्त की कुछ नक़्लें निकालें कितनी पर्चियों में जीते हैं हम लम्हों की बेश-कीमती रसीदें भी तो हैं कुछ तो हिसाब रखें उन का क़िस्मत पक्की पर्ची तो रख लेगी ज़िंदगी की कुछ कच्ची पर्चियाँ हमारे पास भी तो होंगी कुछ नक़्लें कुछ रसीदें लिखाइयाँ कुछ मुट्ठियों में हो तो तसल्ली रहती है सुनो न कहीं से कोई कार्बन-पेपर ले आओ

Varsha Gorchhia

0 likes

बातों का मर्तबान अचानक छूट गया है हाथों से बातों के नाज़ुक जिस्म अब लफ़्ज़ों की किरचों से ज़ख़्मी है और लहू-लुहान बे-बस से हैं ख़याल और मा'नी भी उछल कर दूर पड़े हैं कोने में रोते से बिलखते से सारे एहसास पड़े है फ़र्श पे मर कर भार पोंछ कर समेट लूँ फिर भी चखते तो न मिटेंगे

Varsha Gorchhia

2 likes

सेवइयाँ खाने का मन करता है कब हारे में रखी हांडी उतरेगी कब माँ सवइयाँ परोसेगी कब से थाली लिए खड़ी हूँ पहले धुआँ गहरा था आँखों में चुभता था खारा था बहुत अब हल्का है झीना है ख़ुशबू आती है धुएँ से गुर गुर की आवाज़ें आने लगी है माँ हांडी उतार लो सवइयाँ पक गई हैं

Varsha Gorchhia

0 likes

जानते हो तुम मुझे चूड़ियाँ पसंद हैं लाल नीली हरी पीली हर रंग की चूड़ियाँ जहाँ भी देखती हूँ चूड़ियों से भरी रेड़ी जी चाहता है तुम सारी ख़रीद दो मुझे मगर तुम नहीं होते ना मेरे साथ ना मेरे पास ख़ुद ही ख़रीद लेती हूँ नाम से तुम्हारे पहनती हूँ छनकाती हूँ उन्हें बहुत अच्छी लगती है हाथों में मेरे कहते रहते हो तुम चुपके से कानों में मेरे जानते हो तुम मुझे चूड़ियाँ पसंद हैं

Varsha Gorchhia

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Varsha Gorchhia.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Varsha Gorchhia's nazm.