कोई तो बात ऐसी थी जुदाई का सबब ठहरी जो सदियों के सफ़र से थी मगर पलकों पे पुल बन कर खटकती है नफ़स में आ के चुभती है जो दिल में छेद करती है ज़माने पर अयाँ सब भेद करती है करूँँ जब याद तो ये साँस रुकता है ये दिल थम थम के चलता है कोई तो बात ऐसी थी
Related Nazm
राजा बोला रात है रानी बोली रात है मंत्री बोला रात है संतरी बोला रात है ये सुब्ह सुब्ह की बात है
Gorakh Pandey
48 likes
बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम, बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम कभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से तो मुझ को ख़ुदारा ग़लत मत समझना कि मेरी ज़रूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम हैं फूलों की डाली पे बाँहें तुम्हारी हैं ख़ामोश जादू निगाहें तुम्हारी जो काँटे हूँ सब अपने दामन में रख लूँ सजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी नज़र से ज़माने की ख़ुद को बचाना किसी और से देखो दिल मत लगाना कि मेरी अमानत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम... कभी जुगनुओं की क़तारों में ढूँडा चमकते हुए चाँद तारों में ढूँडा ख़िज़ाओं में ढूँडा बहारों में ढूँडा मचलते हुए आबसारों में ढूँडा हक़ीक़त में देखा, फ़साने में देखा न तुम सा हँसी, इस ज़माने देखा न दुनिया की रंगीन महफ़िल में पाया जो पाया तुम्हें अपना ही दिल में पाया एक ऐसी मसर्रत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा और इस पर ये काली घटाओं का पहरा गुलाबों से नाज़ुक महकता बदन है ये लब हैं तुम्हारे कि खिलता चमन है बिखेरो जो ज़ुल्फ़ें तो शरमाए बादल फ़रिश्ते भी देखें तो हो जाएँ पागल वो पाकीज़ा मूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम जो बन के कली मुस्कुराती है अक्सर शब हिज्र में जो रुलाती है अक्सर जो लम्हों ही लम्हों में दुनिया बदल दे जो शाइ'र को दे जाए पहलू ग़ज़ल के छुपाना जो चाहें छुपाई न जाए भुलाना जो चाहें भुलाई न जाए वो पहली मोहब्बत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम
Tahir Faraz
54 likes
मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
Sahir Ludhianvi
52 likes
क्यूँ उलझे-उलझे रहते हो? कुछ बोलो तो, कुछ बात करो! क्या अब भी तन्हा रातें हैं? क्या दर्द ही दिल बहलाते हैं? क्यूँ महफ़िल रास नहीं आती? क्यूँ कोयल गीत नहीं गाती? क्यूँ फूलों से ख़ुशबू गुम है? क्यूँ भँवरा गुमसुम- गुम-सुम है? इन बातों का क्या मतलब है? कुछ बोलो तो, कुछ बात करो! क्यूँ अम्मा की कम सुनते हो? क्या भीतर-भीतर गुनते हो? क्यूँ हँसना-रोना भूल गए? क्यूँ लकड़ी जैसे घुनते हो? क्या दिल को कहीं लगाए हो? क्या इश्क़ में धोका खाए हो? क्या ऐसा ही कुछ मसअला है? कुछ बोलो तो, कुछ बात करो!
Raghav Ramkaran
42 likes
"सुनो शादी मुबारक हो" सुनो शादी मुबारक हो दुल्हन तो बन चुकी हो अब बता भी दो कि सुनने को वो ख़ुश-ख़बरी मैं आऊँ अब किसी दिन छोड़ जाएगी तेरे बेटे को कोई जब किसी आशिक़ की माँ का दुख समझ पाए तू शायद तब इसे इंसाफ़ कहते हैं इसी से भागते हैं सब इसी को पूजता हूँ मैं इसी से काँपते हैं रब मगर तब तक मुनासिब है तड़प को बोलना करतब सुनो शादी मुबारक हो दुल्हन तो बन चुकी हो अब
Anant Gupta
26 likes
More from Fakhira batool
बहुत बे-दर्द लम्हा था हमारे दरमियाँ आ कर नहीं पल भर रुका जानाँ न हम दोनों से कुछ पूछा न उस ने कुछ भी बतलाया फ़क़त छू कर हमें गुज़रा लहू में सरसराहट सी ज़बाँ में लड़खड़ाहट सी अता कर के भुला बैठा बहुत बे-दर्द लम्हा था बहुत ही याद आता है
Fakhira batool
0 likes
मोहब्बतों का ख़याल रखना कहीं न ऐसा हो बे-ध्यानी में तुम हथेली को खोल डालो हवाएँ साज़िश पे आन उतरीं तो ख़ुश्क पत्तों सा हाल होगा गुलाब-रुत का ज़वाल होगा मोहब्बतों का ख़याल रखना
Fakhira batool
0 likes
कल शब फ़ोन किया जब तुम ने हौले हौले से यूँँ बोले जानाँ सुन लो तुम ने आ कर चाहत का एहसास दिला कर मेरे दिल को जीत लिया है इतनी जल्दी वापस क्यूँ तुम लौट गई हो पलट के एक नज़र भी न देखा उस की जानिब आज तलक जो देख रहा है राह तुम्हारी जिस को सच-मुच मार गई है चाह तुम्हारी
Fakhira batool
0 likes
कहा तुम ने मुझे तुम से मोहब्बत हो नहीं सकती यही कहना था तो आग़ाज़ में ही कह दिया होता न ये कहते हुए आँखें चुराते तुम न मेरे दिल में इतना बे-तहाशा दर्द ही उठता न मेरी बेबसी का इम्तिहाँ ऐसे लिया होता अगर तुम को यही कहना था पहले कह दिया होता
Fakhira batool
0 likes
ज़माना चाहता है हर-घड़ी बस नित-नई बातें नए दिन और नई शा में नई सुब्हें नई रातें नई क़स्में नए वादे नए रिश्ते नए नाते पुराने जो भी क़िस्से थे वो अब उस को नहीं भाते मैं ख़ुद लफ़्ज़ों की मिसरों की बहम तकरार से जानाँ बहुत उक्ता गई थी अब तो मैं ने यूँँ किया लफ़्ज़ों को मिसरों को लपेटा सुर्ख़ काग़ज़ में फिर उन को मन में रक़्साँ आग दिखला दी हवा में राख के उड़ते हुए ज़र्रों ने जब पूछा करेगी क्या सुनेगी क्या कहेगी क्या तिरा दामन तो ख़ाली है कहा मैं ने मुझे अब कुछ नहीं करना मुझे अब कुछ नहीं सुनना मुझे अब कुछ नहीं कहना कहानी ओढ़ ली मैं ने
Fakhira batool
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Fakhira batool.
Similar Moods
More moods that pair well with Fakhira batool's nazm.







