nazmKuch Alfaaz

कुछ ज़ादा ही अपनों से घिर रहा हूँ मुझे अकेला छोड़ दो अकेला हूँ और कहता फिर रहा हूँ मुझे अकेला छोड़ दो हर परिंदा घोंसले का खाब नहीं देखता ये सफ़र बिन हम सफ़र के ही सही मुझे चिढ़ होती है , मुझे मत बुलाओ माना तुम लोग मेरे घर के ही सही तुम कहते हो के मैं ये अब कह रहा हूँ पर अकेला रह ना पाऊँगा पर मैं अपने फ़ैसलों पे स्थिर रहा हूँ जानता हूँ किस कुँए में गिर रहा हूँ मुझे अकेला छोड़ दो अकेला हूँ और कहता फिर रहा हूँ मुझे अकेला छोड़ दो

Related Nazm

वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते-जी मसरूफ़ रहे कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया काम इश्क़ के आड़े आता रहा और इश्क़ से काम उलझता रहा फिर आख़िर तंग आ कर हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया

Faiz Ahmad Faiz

160 likes

मैं सिगरेट तो नहीं पीता मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?" बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.

Gulzar

107 likes

मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

52 likes

"दरीचा-हा-ए-ख़याल" चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें और ये सब दरीचा-हा-ए-ख़याल जो तुम्हारी ही सम्त खुलते हैं बंद कर दूँ कुछ इस तरह कि यहाँ याद की इक किरन भी आ न सके चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें और ख़ुद भी न याद आऊँ तुम्हें जैसे तुम सिर्फ़ इक कहानी थीं जैसे मैं सिर्फ़ इक फ़साना था

Jaun Elia

27 likes

दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में जीते-जी इस का मान रखें मर कर मर्यादा याद रहे हम रहें कभी ना रहें मगर इस की सज-धज आबाद रहे जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें परवरदिगार,मैं तेरे द्वार पर ले पुकार ये आया हूँ चाहे अज़ान ना सुनें कान पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

Kumar Vishwas

66 likes

More from Yuvraj Dutt

मेरे बिस्तर से रोज़ एक इंसान उठता है मेरे बिस्तर पे रोज़ एक लाश सोती है मुझे आता है इंसान से लाश हो जाना ग़म के बादलों का आकाश हो जाना यक़ीन भरे वादों का काश हो जाना टूट जाना और पाश पाश हो जाना वक़्त के हाथों में इक ताश हो जाना दफ्तर के कामों से हताश हो जाना मुझे आता है इंसान से लाश हो जाना मैं ऐसे नशे में सोता हूँ बिछौने पे जैसे पालकी में कोई बच्ची अय्याश सोती है मेरे बिस्तर से रोज़ एक इंसान उठता है मेरे बिस्तर पे रोज़ एक लाश सोती है

Yuvraj Dutt

1 likes

आज माँ ने मेरी आँखों पे हथेलिआं रखीं पलकों के नीचे उबल रहे जवालामुखी एक पल में बर्फ हो गए मानो माँ को पता हो मेरी तपती हुई पुतलिओं का राज़ मानो माँ ने मेरी आँखों से कभी पढ़ लिया हो नाम तेरा कई बार लगा के माँ ने मुझे रोते हुए देख लिया है रोने से पहले ही कई बार लगा के माँ ने वो सारी बातें सुन लीं हैं जो तू ने बिछड़ते वक़्त छिपालीं मुझ सेे और तो और कई बार लगता है माँ ने मेरी वो कवितायेँ भी पढ़ी हैं जो अभी लिखनी हैं मैं ने

Yuvraj Dutt

0 likes

मैं एक मदारी होता हूँ जब दुनिया आई होती है याद की एक बंदरिआ कंधे पर बैठाई होती है बिखरी बिखरी ज़ुल्फ़ें अक्सर खोया खोया सा लगता हूँ मैं इसीलिए जग जाऊँ भी तो सोया सोया सा लगता हूँ जीवन की लंबी तार पर मन नंगे पाँव चलता है आँखें डूब जाती हैं जब शाम को सूरज ढलता है साँसों की ढ़ोलक पे जब मन कोई नगमा गाता है रूह तांडव करने लगती है रोम रोम चिल्लाता है कौन लौट कर आता है यहाँ हर कोई आगे बढ़ता है पीतल के गहनों पर कोई नीलम थोड़ा जड़ता है इक मैं ही हूँ जो हस्ता हुआ भी रोया रोया सा लगता हूँ मैं इसीलिए जग जाऊँ भी तो सोया सोया सा लगता हूँ

Yuvraj Dutt

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Yuvraj Dutt.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Yuvraj Dutt's nazm.