sherKuch Alfaaz

आ गई सब कुछ गँवा कर तुझ को पाने की घड़ी और फिर सब कुछ गँवाना मेरी फ़ितरत हो गई ज़िंदगानी जीने दे तो जी भी लें हम कुछ घड़ी ये मगर क्या हो गया है फिर मुहब्बत हो गई

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जी भर गया है अब तो जी भर चाहने वालों से भाग रहा हूँ मैं भी मुझ सेे भागने वालों से

nakul kumar

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न बदला है कुछ भी किसी हाल में वही हैं मसाइल नए साल में ज़रा ग़ौर से अब मुझे देखिए वही एक बन्दा ख़द-ओ-ख़ाल में

nakul kumar

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जिस की ख़ातिर शे'र लिखे हैं अश्क भरे पैमानों से उस लड़की का नाम ग़ज़ल है शे'र नहीं कह पाती है कोई तो समझाओ उस को दिल मेरा वीराना है वो लड़की जो ख़्वाब में अक्सर आती है रह जाती है

nakul kumar

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कहो क्या हो गया जो मिल न पाए यार से अपने निहारो चाँद को फिर यार के घर द्वार को देखो

nakul kumar

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हर बार मुझे हर साँस मिरी इक बात यही समझाती है कुछ काम करो कुछ नाम करो ये उम्र निकलती जाती है मैं कहता हूँ कि समझो तो कोई बात नहीं ऐसी लेकिन इस दुनिया में शोहरत की हवस मुझे अंदर से खा जाती है

nakul kumar

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