आ ही गया मैं देख तेरे शहर अब तारीख़ अब मिलने की कैसे टलती है
Related Sher
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
173 likes
गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
267 likes
भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
272 likes
More from Lalit Mohan Joshi
कहो हमें भला बुरा या कुछ भी तुम यहाँ मगर कहे जो सच वो आइना भी पास हो
Lalit Mohan Joshi
0 likes
वक़्त की अब चोट हम को रास ऐसे आ गई है जबसे जीने की नई फिर आस जैसे आ गई है ज़िंदगी ज़िंदा रहे गर फूल तब पाएँगे खिल बात हम में ऐसी देखो यार कैसे आ गई है
Lalit Mohan Joshi
3 likes
ज़बाँ मीठी रखो या तल्ख़ तुम मगर सच कहने की आदत रखो
Lalit Mohan Joshi
3 likes
फ़र्द-ए-बशर हो तुम फ़क़त क्यूँँ बोलते हो तुम सक़त मग़रूर हो ख़ुद इल्म में ये ऐब क्यूँँ लाए फ़क़त
Lalit Mohan Joshi
2 likes
पाप का इक मैं दरिया ही हूँ डूबकर आप तर जाइए
Lalit Mohan Joshi
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Lalit Mohan Joshi.
Similar Moods
More moods that pair well with Lalit Mohan Joshi's sher.







