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आबरू तो आबरू है आबरू पर क्या लिखूँ बस ख़ुदा ही है ये बिल्कुल हू-ब-हू पर क्या लिखूँ ये मुहब्बत चीज़ ही ऐसी बनी है बा-गज़ब हर कोई माइल है हर इक आरज़ू पर क्या लिखूँ

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मैं ने सफ़ेद-पोशों में ढूँढा बहुत मगर ईमान का मुझे तो निशां तक नहीं दिखा

Nityanand Vajpayee

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उन की यादों का निशिदिन अभिनंदन करते रहते हैं रात गुज़रने की ख़ातिर हम क्रंदन करते रहते हैं विक्षिप्तों के जैसी स्थिति में हैं हम अब क्या बतलाएँ निश्छल प्रेमिल मन से प्रिय का वंदन करते रहते हैं

Nityanand Vajpayee

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मुनासिब हो कि तुम मिल जाओ मुझ को वगरना मैं जहाँ को ख़ाक कर दूँगा

Nityanand Vajpayee

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ये भरम मेरा बना रहने भी दो मेरे सीने को तना रहने भी दो मानता हूँ मैं कि आओगी न तुम फोटो देने से मना रहने भी दो

Nityanand Vajpayee

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कह सका हूँ चंद ही दमदार शे'र ज़्यादातर होकर गए बीमार शे'र कहते कहते जब हुआ बीमार मैं तब कहीं जा कर हुए दो-चार शे'र

Nityanand Vajpayee

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