आग लग जाएगी पानी में लगा कर देख लो आज़माना है अगर तो आज़मा कर देख लो है नहीं मुमकिन मुकर जाऊँ कभी वादे से मैं ज़हर भी चाहो अगर तो तुम पिला कर देख लो
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम मुझे भी जुदाई का अब डर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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था इक शख़्स वो जो कि क़ातिल था मेरा मिरे दर्द-ए-दिल की शिफ़ा जानता था
Shashank Shekhar Pathak
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मिलने आए या न आए मेरे ख़्वाबों में तू तेरे तसव्वुर को मैं ख़्वाब बना लेता हूँ तेरे जाने का ग़म तो है मगर इतना नहीं तेरी तस्वीर से अब काम चला लेता हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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मेरे ख़्वाब नहीं पूरे होते हाँ नींद से मैं अब डरता हूँ तेरी याद अगर आ जाए तो तस्वीर से बातें करता हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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तेरी अंँगड़ाई के आलम का ख़याल आया जब ज़ेहन-ए-वीरांँ में खनकने लगे कंगन कितने
Shashank Shekhar Pathak
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