तेरी अंँगड़ाई के आलम का ख़याल आया जब ज़ेहन-ए-वीरांँ में खनकने लगे कंगन कितने
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था
Tehzeeb Hafi
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किसी का गर सुकूँ हो तो किसी का मसअला हो तुम दुआ हो तुम दवा हो तुम मरज़ हो तुम बला हो तुम
Shashank Shekhar Pathak
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साज़ ख़ामोश कि इक टूटते संगीत के नाम प्यार में हम ने किए गीत समर्पन कितने तौबा ये तमकनत-ए-हुस्न इलाही तौबा एक श्रृंगार को तोड़े गए दर्पन कितने
Shashank Shekhar Pathak
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तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम मुझे भी जुदाई का अब डर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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हवा मेरे अपनों ने दी थी नहीं तो जलाया किसी ने मिरा घर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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दिल की ख़ातिर एक रिश्ते को बचाने के लिए आग मैं ने ही लगा ली ख़ुद मिरे घरबार में
Shashank Shekhar Pathak
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