साज़ ख़ामोश कि इक टूटते संगीत के नाम प्यार में हम ने किए गीत समर्पन कितने तौबा ये तमकनत-ए-हुस्न इलाही तौबा एक श्रृंगार को तोड़े गए दर्पन कितने
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम मुझे भी जुदाई का अब डर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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था इक शख़्स वो जो कि क़ातिल था मेरा मिरे दर्द-ए-दिल की शिफ़ा जानता था
Shashank Shekhar Pathak
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हवा मेरे अपनों ने दी थी नहीं तो जलाया किसी ने मिरा घर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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उस की आँखें झील समुंदर से भी ज़्यादा गहरी थी डूब उन्हीं में मेरी कश्ती पार हो जाया करती थी उस की थी हर बात निराली क्या क्या तुम को बतलाऊँ इक लड़की थी यार कि जो बादल पे साया करती थी
Shashank Shekhar Pathak
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सजा दूँ माँग मैं तेरी लहू से आज मैं अपने बुरा मानो अगर मेरे न तुम सरकार, होली में
Shashank Shekhar Pathak
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