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हवा मेरे अपनों ने दी थी नहीं तो जलाया किसी ने मिरा घर न होता

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साज़ ख़ामोश कि इक टूटते संगीत के नाम प्यार में हम ने किए गीत समर्पन कितने तौबा ये तमकनत-ए-हुस्न इलाही तौबा एक श्रृंगार को तोड़े गए दर्पन कितने

Shashank Shekhar Pathak

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तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम मुझे भी जुदाई का अब डर न होता

Shashank Shekhar Pathak

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मिलने आए या न आए मेरे ख़्वाबों में तू तेरे तसव्वुर को मैं ख़्वाब बना लेता हूँ तेरे जाने का ग़म तो है मगर इतना नहीं तेरी तस्वीर से अब काम चला लेता हूँ

Shashank Shekhar Pathak

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जुर्म किस का किस के सर इल्ज़ाम आया आज रोया जाके तब आराम आया हो रही थी जंग उस के नाम पर और वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया

Shashank Shekhar Pathak

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उस की आँखें झील समुंदर से भी ज़्यादा गहरी थी डूब उन्हीं में मेरी कश्ती पार हो जाया करती थी उस की थी हर बात निराली क्या क्या तुम को बतलाऊँ इक लड़की थी यार कि जो बादल पे साया करती थी

Shashank Shekhar Pathak

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