आगही है अज़ाब या रब कर दे मुझ को भी ख़्वाब या रब आज शबनम के क़तरों से क्यूँ जल रहे हैं गुलाब या रब
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो
MIR SHAHRYAAR
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जी ही जी में कई अहद-ए-वफ़ा करते-करते जी ही जी में वो कई बार मुकरता होगा जाने किस ध्यान में बैठा हुआ होगा वो शख़्स जाने किन रंगों से कमरे को वो भरता होगा
MIR SHAHRYAAR
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तेरे ख़याल में थे गुम अपना ख़याल किस को था ऐसी भी बे-ख़याली का यार मलाल किस को था
MIR SHAHRYAAR
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कई हफ़्तों से अपने कमरे में अपने साए से लड़ रहा हूँ मैं
MIR SHAHRYAAR
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या तो कुछ भी नहीं रहा बाक़ी या सिमट आया बहर-ओ-बर मुझ में मैं कि इक सानिहा हूँ लम्हों का होता क्या क्या है लम्हा-भर मुझ में
MIR SHAHRYAAR
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