आज आए हैं वो 'ज़ामी' मेरे घर बस तसव्वुर है हक़ीक़त कुछ नहीं
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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कहते हैं लोग जिस को सनम बादा-ए-इरम वो तो तिरे लबों की हलावत का नाम है
Parvez Zaami
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मुस्कुरा के तू गर पिलाए तो एक क़तरा फ़ुरात है साक़ी
Parvez Zaami
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मैं तो मुश्ताक़ हूँ उस दिन का अज़ल से 'ज़ामी' कब बपा हश्र हो कब उन का मैं जल्वा देखूँ
Parvez Zaami
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महताब तेरे रुख़ की ज़ियारत का नाम है सिंदूर तेरी माँग का उल्फ़त का नाम है
Parvez Zaami
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चश्म-ए-बद-बीन से न देख हमें यार उल्फ़त-शिआर हैं हम लोग
Parvez Zaami
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