मैं तो मुश्ताक़ हूँ उस दिन का अज़ल से 'ज़ामी' कब बपा हश्र हो कब उन का मैं जल्वा देखूँ
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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महताब तेरे रुख़ की ज़ियारत का नाम है सिंदूर तेरी माँग का उल्फ़त का नाम है
Parvez Zaami
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कहते हैं लोग जिस को सनम बादा-ए-इरम वो तो तिरे लबों की हलावत का नाम है
Parvez Zaami
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चश्म-ए-बद-बीन से न देख हमें यार उल्फ़त-शिआर हैं हम लोग
Parvez Zaami
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ज़िंदगी नाम है अज़िय्यत का ज़ीस्त में ग़म नहीं तो कुछ भी नहीं
Parvez Zaami
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अपने खूँ से चमन को सींचा है फिर भी बे-एतिबार हैं हम लोग
Parvez Zaami
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