आज भी हम ज़िंदा होते वक़्त होता गर हमारा
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
Hastimal Hasti
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँँ कोई बे-वफ़ा नहीं होता
Bashir Badr
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ज़िन्दगी अपने लोगों से कुछ सीखो तुम छोड़ कर के चली क्यूँँ नहीं जाती हो
Shivam Shaw
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ज़िन्दगी अपने सितम को ज़रा देख क्या तुझे भी ख़ुदा का ख़ौफ़ नहीं
Shivam Shaw
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क्या कहूँ अपनी हालत पे दोस्त शे'र तक मेरे मर जाते है
Shivam Shaw
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बुरा या फिर कभी अच्छा लगा मैं जो जैसे थे उन्हें वैसा लगा मैं निकाला मैं गया हूँ इस फ़लक से बता तू अब तुझे कैसा लगा मैं
Shivam Shaw
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पर जब आसमाँ को छूने लगते हैं चिड़िया भूल ही जाती है घर आना
Shivam Shaw
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