क्या कहूँ अपनी हालत पे दोस्त शे'र तक मेरे मर जाते है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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आज भी हम ज़िंदा होते वक़्त होता गर हमारा
Shivam Shaw
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ज़िन्दगी अपने सितम को ज़रा देख क्या तुझे भी ख़ुदा का ख़ौफ़ नहीं
Shivam Shaw
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ज़िन्दगी अपने लोगों से कुछ सीखो तुम छोड़ कर के चली क्यूँँ नहीं जाती हो
Shivam Shaw
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पर जब आसमाँ को छूने लगते हैं चिड़िया भूल ही जाती है घर आना
Shivam Shaw
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बुरा या फिर कभी अच्छा लगा मैं जो जैसे थे उन्हें वैसा लगा मैं निकाला मैं गया हूँ इस फ़लक से बता तू अब तुझे कैसा लगा मैं
Shivam Shaw
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