आज इस संसार में इंसान क्यूँँ दिलगीर है दर-हक़ीक़त ये तकब्बुर पाँव की ज़ंजीर है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ज़िंदगी तू बदल गई लेकिन हम से क्या हो सका मोहब्बत में
Manish Pithaya
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तर्जनी पर गिन सज़ा के दिन मेरे तू इक मुझी पर जुर्म का दावा चला है
Manish Pithaya
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हूँ मुश्त-ए-ख़ाक तू उपकार कर दे हक़ीक़त का मुझे हक़दार कर दे शिकायत-गर भी करते हैं तशक्कुर तू जिस की ज़िंदगी हमवार कर दे
Manish Pithaya
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उठी थी आग चिंगारी से देखो लगी थी शक कि बीमारी से देखो कि दानाई को तुम रक्खो परे अब निभा के तुम भी दिलदारी से देखो
Manish Pithaya
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ज़माने को ज़रूरत है मोहब्बत की मुरव्वत की मगर हम ने तो नफ़रत के सिवा दिल में रखा क्या है
Manish Pithaya
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