आज ख़ुद-कुशी नहीं करनी या'नी शा'इरी नहीं करनी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी
Yasmin Khan
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ज़बाँ की नस टटोली तो ये जाना मैं ने मिरी आवाज़ तो अब भी ज़रा ज़िंदा है
Yasmin Khan
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शहर-ए-बाराँ में मिट्टी का मकाँ मेरा ज़िंदगी शीशे की पत्थर का जहाँ मेरा
Yasmin Khan
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साए में जिस शजर के वो उम्र भर रहा है इक शाख़ से उसी के तेशा बना रखा है
Yasmin Khan
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तज़्किरा छेड़ो न उस की बे-वफ़ाई का अब तुम्हें हम क्या बताए बात क्या क्या हैं
Yasmin Khan
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