आज कुछ घाइल परिंदों की दु'आओं में सुना है आसमाँ चाहे न हो पर पाँव के नीचे ज़मीं हो
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
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अब भी कुछ ऐसे हैं गुलज़ार पुराने बाक़ी सामने जिन के है कम ताज़ा गुलाबों की महक सुन लिए कुहना तराने जो किसी बुलबुल के शोर से कम न लगेगी ये परिंदों की चहक
Dharmesh bashar
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जाएज़ा लेता है फ़ज़ाओं का हर परिंदा उड़ान से पहले
Dharmesh bashar
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तुझ से भी दूर ज़माने के तक़ाज़ों से भी दूर तेरा दीवाना ज़रा देख कहाँ जा निकला
Dharmesh bashar
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सुर्ख़ी की तलब ज़ेहन पे हो जाती है हावी किरदार बदल देता है अख़बार का साया
Dharmesh bashar
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