जाएज़ा लेता है फ़ज़ाओं का हर परिंदा उड़ान से पहले
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ इस से पहले भी हो चुका है कहीं
Jaun Elia
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
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कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
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ये ज़िन्दगी तो हम को कभी की भुला चुकी अब क्या करें कि मौत भी आँखें चुराए है
Dharmesh bashar
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जानलेवा किस क़दर है आलम-ए-बेचारगी जब नज़र आती है बेचारे को चारा ख़ुद-कुशी
Dharmesh bashar
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कैसे बचता शिकस्तगी से बदन जलता रहता है तिश्नगी से बदन अब भी सहमा हुआ है कमरे में शब-ए-रफ़्ता की तीरगी से बदन
Dharmesh bashar
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