जानलेवा किस क़दर है आलम-ए-बेचारगी जब नज़र आती है बेचारे को चारा ख़ुद-कुशी
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे कब कहा है गले लगाओ मुझे तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
Zia Mazkoor
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अब भी कुछ ऐसे हैं गुलज़ार पुराने बाक़ी सामने जिन के है कम ताज़ा गुलाबों की महक सुन लिए कुहना तराने जो किसी बुलबुल के शोर से कम न लगेगी ये परिंदों की चहक
Dharmesh bashar
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तुझ से भी दूर ज़माने के तक़ाज़ों से भी दूर तेरा दीवाना ज़रा देख कहाँ जा निकला
Dharmesh bashar
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न वो क़हक़हे न वो महफ़िलें न वो मय-कदे की है रौनक़ें हुआ क्या कि देखते-देखते ये निज़ाम सारा बदल गया
Dharmesh bashar
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कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
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हम भला कौन हैं तफ़रीक़ बताने वाले उस की मर्ज़ी है वो जिस शख़्स को चाहे देखे
Dharmesh bashar
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