आज लफ़्ज़-ए-मोहब्बत फ़साना हुआ तुझ को देखे भी अब तो ज़माना हुआ हम को सहरा-नवर्दी मिली इश्क़ में अहले दिल का कोई कब ठिकाना हुआ
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
Navneet krishna
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इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या
Navneet krishna
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उस ने बुलवाया मुझे जाना पड़ा बे-सबब ही मुझ को मुस्काना पड़ा
Navneet krishna
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आप को अपना बनाना चाहता हूँ इक नई दुनिया बसाना चाहता हूँ आप को मैं आज़माना चाहता हूँ इक नया ये कारनामा चाहता हूँ
Navneet krishna
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यक़ीं किस तरह कोई उनपे करेगा वो खाते हैं झूठी क़सम देखते हैं नहीं जिस की ता'बीर कोई जहाँ में वही ख़्वाब हम ऐ सनम देखते हैं
Navneet krishna
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