आज़ फिर दर्द ने दस्तक दी है आज़ फिर रात क़यामत होगी
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
Sandeep Thakur
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
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दर्द हो दिल में तो दवा कीजे दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजे
Mirza Ghalib
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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तेरे बिन जितने भी ये दिन कटे हैं समझ ले आग पर पैदल चले हैं
Harun Umar
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रिश्ते कुछ यूँँ भी ख़त्म होते हैं जीते जी लोग दफ़्न होते हैं
Harun Umar
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तुझ सेे कहने में क्या शरम के हम अब किसी दूसरे पे मरते हैं
Harun Umar
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मैं तुम को भूल जाने का कोई वा'दा नहीं करता अगरचे याद करता हूँ मगर ज़्यादा नहीं करता
Harun Umar
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इश्क़ में एक ही बुराई है ये किसी का भला नहीं करता
Harun Umar
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