इश्क़ में एक ही बुराई है ये किसी का भला नहीं करता
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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वहशत है मुझ को लम्स के रिज़्क-ए-हराम से मुझ को मेरे नसीब की रोज़ी नहीं मिली
Harun Umar
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रिश्ते कुछ यूँँ भी ख़त्म होते हैं जीते जी लोग दफ़्न होते हैं
Harun Umar
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साहिब-ए-इल्म बने फिरते हो अच्छा बतलाओ मोहब्बत क्या है
Harun Umar
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तेरे बिन जितने भी ये दिन कटे हैं समझ ले आग पर पैदल चले हैं
Harun Umar
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नफ़रतें वसवसे हसद किना ये ही तोहफ़े दिए हैं अपनों ने
Harun Umar
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