नफ़रतें वसवसे हसद किना ये ही तोहफ़े दिए हैं अपनों ने
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं
Tehzeeb Hafi
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पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
nakul kumar
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इक रोज़ इक नदी के किनारे मिलेंगे हम इक दूसरे से अपना पता पूछते हुए
Shahbaz Rizvi
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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
Nikunj Rana
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वहशत है मुझ को लम्स के रिज़्क-ए-हराम से मुझ को मेरे नसीब की रोज़ी नहीं मिली
Harun Umar
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तू बताएगा मुझे हिज्र का आलम 'हारून' मेरी हर रात गुज़रती है मोहर्रम की तरह
Harun Umar
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मैं तुम को भूल जाने का कोई वा'दा नहीं करता अगरचे याद करता हूँ मगर ज़्यादा नहीं करता
Harun Umar
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इश्क़ में एक ही बुराई है ये किसी का भला नहीं करता
Harun Umar
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पहले निकले तो रूह भीतर से फिर तुम्हें एहतिमाम से भूलें
Harun Umar
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