आज फिर से शाम ढलने को है साक़ी मुझ से दुख कोई निकलने को है साक़ी उम्र ग़म में यार कटती अब नहीं ये मन मुहब्बत से निकलने को है साक़ी
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़ख़्म तिरे हैं जो सब पाले हुए रखे हैं मैं ने वो कुछ ख़त अब तक भी सँभाले हुए रखे हैं मैं ने
Pankaj murenvi
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ज़ख़्म दिल पर जो मुहब्बत में लगे नाकामियों के उन में से इक-आध सिल जाए अगर तुम लौट आओ
Pankaj murenvi
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यार क़यामत हैं उस की आँखें दिल की चाहत हैं उस की आँखें सब ढूँढ़ते है मय-ख़ाना दुख में मेरी राहत हैं उस की आँखें
Pankaj murenvi
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उस के बाज़ू में कितने भी लोग रहें बैठे दरख़्त छाँव में रखना वो हम को चाहता है बस
Pankaj murenvi
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उस के गालों को झुमके चूमते हैं मेरा हक़ कोई और खा रहा है
Pankaj murenvi
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