आज उस को कुछ दिनों के बा'द देखा इस क़दर देखा कभी देखा नहीं था
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
Rahat Indori
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हम भी उसी अंजाम पे आ कर हुए ख़ुद से फ़ना जिस मोड़ के आगे समुंदर के सिवा कुछ भी नहीं
Abhay Mishra
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देरी से समझोगे इनका साथ मगर तुम क्या जानो ऐसे लोगों का होना जो ख़ूब अकेले रहते हैं
Abhay Mishra
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वो कली अब ख़ुद निखरती जा रही है धूप आने तक जो कुछ सुकड़ी हुई थी
Abhay Mishra
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बहुत डूबे चलो अब तो किनारा कर लिया जाए हमारा था उसे मेरा तुम्हारा कर लिया जाए अँधेरा है बहुत चारों तरफ़ कुछ ऐसा करते हैं जलाकर दरमियाँ का सब उजाला कर दिया जाए
Abhay Mishra
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उन लबों को चूम कर पगला गया हूँ एक बोसा ये क़यामत कर रहा है
Abhay Mishra
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