आख़िर कैसे ये लोग है कैसी ये मक्कारी करते है माँ पर लिखने वाले ही अब माँ से गद्दारी करते है
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
Rahat Indori
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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मैं अकेला ही नहीं था इश्क़ में जो लिखे उस ने वो ख़त भी देखिए काग़ज़ी है इश्क़ अब तो मानिए काग़ज़ों पर दस्तख़त भी देखिए
Ravi 'VEER'
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शा'इरी ये हुस्न और ये इश्क़ की बातें जनाब इक समय तक ठीक है फिर छोड़ देनी चाहिए
Ravi 'VEER'
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मैं भला कब तक तेरी तस्वीर ही देखा करूँँ तू कभी तो रु-ब-रु होकर मुझे आराम दे
Ravi 'VEER'
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देखिए ये डिग्रियाँ दीवार पर धूल की इन पर परत भी देखिए देखिए सच देश के हालात का और क्या इस में ग़लत भी देखिए
Ravi 'VEER'
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तितलियों की थी ज़रूरत सो उसे रक्खा मगर वो बग़ीचे के सभी फूलों को पत्थर कर गया
Ravi 'VEER'
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