आख़िरश बन ही गया वो आदमीयत का ख़ुदा बेड़ियाँ काटीं उसी ने जिस ने पहनाई मुझे
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो जो ख़ुद इक गुलाब है यारो आज उस को गुलाब देना है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो शाख़ों पे गुलाब इक और आया लो माह-ए-फ़रवरी का दौर आया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मिरी जाँ बेबसी क्या दर्द क्या है ये उन सेे पूछना जो बे-ज़बाँ हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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रोज़ हों गर हों ख़ुशी के लम्हे एक दिन होने से क्या होते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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