आख़िरी बार मैं कहता हूँ रक़ीबों सुन लो देखना जो है तुम्हें दूर से हट कर देखो
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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वो रो रहा है उसे चुप करा दो मत रोए कि इस जहाँ के लिए रो रहा यही दुनिया
Shadab bastavi
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सल्तनत तर्क किया क्यूँ चुना जंगल उस ने एक राजा ने मुहब्बत यूँँ निभाई होगी
Shadab bastavi
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वो मुझ सेे रोज़ कहती थी मुझे तुम चाँद ला कर दो उसे इक आइना देकर अकेला छोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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उस की तस्ख़ीर नहीं कोई जहाँ में साक़ी चाँद लाओ या ज़मीं को ही उलट कर देखो
Shadab bastavi
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जिन के जलने से दमकती हो ये दुनिया 'शादाब' उन चराग़ों से कभी तुम भी तो सट कर देखो
Shadab bastavi
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