सल्तनत तर्क किया क्यूँ चुना जंगल उस ने एक राजा ने मुहब्बत यूँँ निभाई होगी
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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उदासी रो के ये बोली मैं हूँ दरकार-ए-शादाबी मैं तेरी आशियाँ की सम्त उस को मोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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वो रो रहा है उसे चुप करा दो मत रोए कि इस जहाँ के लिए रो रहा यही दुनिया
Shadab bastavi
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वो मुझ सेे रोज़ कहती थी मुझे तुम चाँद ला कर दो उसे इक आइना देकर अकेला छोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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मैं तेरे वास्ते वो सारे रिश्ते छोड़ आया हूँ जो मेरी आबरू थे दिल उन्हीं का तोड़ आया है
Shadab bastavi
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उस की तस्ख़ीर नहीं कोई जहाँ में साक़ी चाँद लाओ या ज़मीं को ही उलट कर देखो
Shadab bastavi
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