आना है तो फिर आइए शिकवे भुलाइए जाना है अगर आप को तो जाइए चुप-चाप
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने
Shadab Shabbiri
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ज़मीं नीचे न ऊपर आसमाँ है कहाँ हम लोग लाए जा रहे हैं
Shadab Shabbiri
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वक़्त-ए-आख़िर जो रफ़ीक़ों ने वफ़ा की होती है यक़ीं मुझ को कभी जंग न हारा होता
Shadab Shabbiri
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तेरे शक़ को यक़ीं में बदलूँगा आसमाँ को ज़मीं में बदलूँगा
Shadab Shabbiri
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उस सेे मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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