वक़्त-ए-आख़िर जो रफ़ीक़ों ने वफ़ा की होती है यक़ीं मुझ को कभी जंग न हारा होता
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने
Shadab Shabbiri
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ज़मीं नीचे न ऊपर आसमाँ है कहाँ हम लोग लाए जा रहे हैं
Shadab Shabbiri
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ज़माना तो उठाना चाहता है मैं पैर अपने जमाना चाहता हूँ
Shadab Shabbiri
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किसी को न शिकवा शिकायत रहे सभी को सभी से मोहब्बत रहे तिरंगे के नीचे रहें अम्न से ख़ुदाया तिरंगा सलामत रहे
Shadab Shabbiri
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मन्ज़र कोई नहीं है नहीं रंग-ओ-बू मगर शादाब मेरा नाम है अफ़सोस कीजिए
Shadab Shabbiri
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