आँधी तूफ़ाँ से लड़ती टूटी हुई कश्ती दुनिया में है ही नहीं वालिद जैसी हस्ती
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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मिलना हमारा कम हुआ फिर बात कम हुई क़िस्तों में मुझ ग़रीब की ख़ैरात कम हुई
Bhawana Srivastava
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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
Jaun Elia
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हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा
Nida Fazli
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तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है
Manoj Azhar
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उसे हर वक़्त करता हूँ महसूस वो जिसे आज तक छुआ ही नहीं
Prit
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पहले मूरत में प्राण डाले फिर आदमी आप हो गया पत्थर
Prit
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'प्रीत' जिस तिस बहाने कर भी ले एक तितली से बात फूलों की
Prit
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कृष्ण से इश्क़ कर लिया मैं ने कोई लड़की नहीं लुभाती अब
Prit
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नौकरी पा के लौटा मैं जब घर देखा तो उस की शादी हो चुकी थी
Prit
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