आँखों के कोनों से फिसली और पलकों से छूट गई नींद भी इक धागे जैसी है टूट गई तो टूट गई
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
Varun Anand
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली
Mohit Subran
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यही है आरज़ू अब तो कि इस चलती कहानी में मिरा किरदार मर जाए कहानी ख़त्म हो जाए
Mohit Subran
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यक़ीं ईमाँ वफ़ादारी की बातें तू न कर मुझ से तिरी ही वज्ह से खाए हैं जितने धोके खाए हैं
Mohit Subran
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ये जो दबा दी तुम ने ख़बर आज टीवी पे तुम क्या समझते हो मुझे इस की ख़बर नहीं
Mohit Subran
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