ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
Vikram Gaur Vairagi
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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मैं ने जैसी चाही थी ना वैसी इन में खनखन नइँ जितने प्यारे हाथ हैं तेरे उतने प्यारे कंगन नइँ
Varun Anand
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं
Mohit Subran
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ये जो दबा दी तुम ने ख़बर आज टीवी पे तुम क्या समझते हो मुझे इस की ख़बर नहीं
Mohit Subran
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ये जो अवाम है इस को तू ना-तवाँ न समझ इसी अवाम ने इक सल्तनत ढहा डाली
Mohit Subran
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वक़्त ने छोड़ा न इक हाथ भी इन हाथों में ज़िन्दगी तुझ को गुज़ारूँ तो गुज़ारूँ कैसे
Mohit Subran
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