ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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वक़्त ने छोड़ा न इक हाथ भी इन हाथों में ज़िन्दगी तुझ को गुज़ारूँ तो गुज़ारूँ कैसे
Mohit Subran
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वो शोर हो रोने का कि हो शोर हँसी का फिर शोर वो कैसा भी हो बर्दाश्त नहीं है
Mohit Subran
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सफ़र ज़मीं का तमाम होगा सफ़र फ़लक का करूँँगा मैं भी यही तो अब इक ख़ुशी बची है कि एक दिन तो मरूँगा मैं भी
Mohit Subran
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नज़र को घुमाओ ज़रा और देखो कि मौजूद किरदार इक-इक यहीं है तुम्हारी कहानी हक़ीक़त अगर है हमारा भी क़िस्सा ख़याली नहीं है
Mohit Subran
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