सफ़र ज़मीं का तमाम होगा सफ़र फ़लक का करूँँगा मैं भी यही तो अब इक ख़ुशी बची है कि एक दिन तो मरूँगा मैं भी
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मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया
Tehzeeb Hafi
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा
Khursheed Rizvi
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सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
Kumar Vishwas
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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ज़रा से शक पे हुआ ख़त्म राब्ता लेकिन ज़रा सा शक न हुआ ख़त्म दरमियाँ से मगर
Mohit Subran
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ये कैसा इम्तिहाँ आख़िर ये कैसी आज़माइश है समझ में आ गया है सब दिली क्या तेरी ख़्वाहिश है अगर तू चाहता है ऐसा तो ले होने देता हूँ वगरना जानता हूँ पहले से क्या तेरी साज़िश है
Mohit Subran
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वो ख़ुदा क्यूँ न हो प इक ख़्वाहिश हर किसी की अधूरी रहती है
Mohit Subran
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ये जो दबा दी तुम ने ख़बर आज टीवी पे तुम क्या समझते हो मुझे इस की ख़बर नहीं
Mohit Subran
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